भोपाल/जबलपुर | मध्यप्रदेश में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने जा रही है। जबलपुर में टी-सीरीज टैंकों की ओवरहॉलिंग के लिए करीब 472 करोड़ रुपये की परियोजना का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने व्हीकल फैक्ट्री परिसर में परियोजना का भूमि-पूजन किया।
नई परियोजना के तहत जबलपुर में हर साल 80 टी-सीरीज टैंकों की ओवरहॉलिंग की क्षमता विकसित की जाएगी। सरकार के अनुसार, इससे भारतीय सेना की टैंकों की रखरखाव और अपग्रेडेशन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था की दिशा में अहम कदम : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जबलपुर की नई परियोजना को केवल रक्षा आधुनिकीकरण से जुड़ा काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और मजबूत सेना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
उन्होंने कहा कि जबलपुर की आर्मर्ड फैक्ट्री ने लंबे समय से रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। नई परियोजना से इस क्षमता को और विस्तार मिलेगा।
हर साल करीब 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की जरूरत : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय सेना को हर वर्ष लगभग 230 टैंकों की ओवरहॉलिंग की आवश्यकता होती है। वर्तमान में अवाडी में करीब 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग क्षमता है। ऐसे में करीब 80 टैंकों की अतिरिक्त क्षमता की जरूरत थी, जिसे जबलपुर में शुरू होने वाली परियोजना के जरिए पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि टी-72 और टी-90 जैसे टैंक भारतीय सेना की जमीनी युद्ध क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और लंबे समय तक संचालन के बाद इनके रखरखाव और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता होती है।
जबलपुर में बढ़ेंगे रोजगार और औद्योगिक अवसर : नई परियोजना से जबलपुर में रक्षा क्षेत्र से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री ने कहा कि परियोजना से स्थानीय लोगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी काम के नए अवसर मिल सकते हैं।
उन्होंने जबलपुर को आधुनिक तकनीक के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
मध्यप्रदेश में डिफेंस और एयरोस्पेस हब की तैयारी : रक्षा मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में रक्षा विनिर्माण से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में रक्षा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित निवेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्पेस, एयरो और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब विकसित करने की दिशा में आधार तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में बढ़ता निवेश प्रदेश के औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है।
विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता घटाने पर जोर : रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में हथियारों के साथ तकनीक, साइबर क्षमता और सप्लाई चेन भी महत्वपूर्ण हैं। भारत का लक्ष्य रक्षा उपकरणों के निर्माण, मरम्मत, रखरखाव और तकनीकी अपग्रेडेशन के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता को कम करना है।
आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अनुसार, जबलपुर में प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए प्रतिवर्ष 80 टैंकों की ओवरहॉलिंग की जा सकेगी। कंपनी के पास टी-72 और टी-90 टैंकों की ओवरहॉलिंग का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव बताया गया है।

