नई दिल्ली। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बाल श्रम, मानव तस्करी और शोषण के विरुद्ध चलाए गए विशेष अखिल भारतीय अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। 12 जून से 31 अगस्त 2026 तक चले इस सघन अभियान के दौरान देश भर से 3,800 से अधिक बच्चों को बाल मजदूरी के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाया गया। वहीं, बच्चों से अवैध रूप से काम कराने और उनका शोषण करने वालों के खिलाफ 575 से अधिक प्राथमिकियां (FIR) दर्ज की गई हैं।
प्रशासन, पुलिस और श्रम विभाग का रहा साझा समन्वय : एनसीपीसीआर ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों, श्रम विभागों, पुलिस प्रशासन और बाल कल्याण समितियों के साथ मिलकर संवेदनशील इलाकों, कारखानों, ढाबों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों पर लक्षित बचाव अभियान चलाए। आयोग ने नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए जमीनी स्तर की बाधाओं को दूर किया और सभी राज्यों से बचाए गए बच्चों, दर्ज मामलों और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) का त्वरित डेटा संकलित किया।
पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने पर विशेष प्राथमिकता : अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों को मुक्त कराना ही नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक पुनर्वास को सुनिश्चित करना भी रहा। आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत मुक्त कराए गए बच्चों को आवश्यक मुआवजा दिलाने, परिवारों की काउंसलिंग करने और उन्हें अनिवार्य रूप से स्कूली शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की गई है।
जागरूकता के लिए चला व्यापक जनसंपर्क अभियान : अभियान के दौरान सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों से आमजन को बाल श्रम कानून और बाल तस्करी की तुरंत रिपोर्ट करने के प्रति जागरूक किया गया। एनसीपीसीआर ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के अधिकारों का हनन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

