TDB-DST ने 3D-प्रिंटेड कस्टमाइज्ड ‘बोन ग्राफ्ट’ के लिए सेरामैट प्राइवेट लिमिटेड को दी वित्तीय मदद,मरीज की जरूरत के अनुसार तैयार होंगी कृत्रिम हड्डियां;

नई दिल्ली। भारत की हाई-टेक मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षमताओं को पंख लगाने और आयातित स्वास्थ्य उत्पादों के स्वदेशी विकल्प तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने महाराष्ट्र (पालघर) की कंपनी मेसर्स सेरामैट प्राइवेट लिमिटेड (Ceramat Pvt Ltd) को 3D-प्रिंटेड मरीज-विशिष्ट (पेशेंट-स्पेसिफिक) बोन ग्राफ्ट के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता मंजूर की है।

प्राकृतिक हड्डी की तरह काम करेंगे स्वदेशी बायोसिरेमिक ग्राफ्ट : वर्तमान में भारत में जटिल सर्जरी और हड्डी प्रत्यारोपण में इस्तेमाल होने वाले उन्नत बोन ग्राफ्ट का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से भारी कीमत पर आयात किया जाता है। सेरामैट प्राइवेट लिमिटेड स्वदेशी बायोसिरेमिक सामग्री और 3D प्रिंटिंग तकनीक का समन्वय करके इस कमी को दूर करेगी:

  • समान संरचना: कंपनी हाइड्रॉक्सीएपेटाइट और बीटा-ट्राइकैल्शियम फॉस्फेट आधारित बायोमटेरियल विकसित कर रही है, जो प्राकृतिक मानव हड्डी की खनिज संरचना के बिल्कुल समान होते हैं।

  • सटीक फिटिंग: डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग (DLP) और एक्सट्रूज़न-आधारित 3D प्रिंटिंग तकनीकों के जरिए प्रत्येक मरीज के शारीरिक ढांचे (एनाटॉमी) और जटिल ज्यामिति के अनुरूप शत-प्रतिशत सटीक ग्राफ्ट बनाए जा सकेंगे।

प्रौद्योगिकी उपभोक्ता से ‘विकासकर्ता’ बनेगा भारत: टीडीबी : टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने इस सहयोग पर कहा कि भारत को केवल विदेशी तकनीकों का उपभोक्ता बने रहने के बजाय स्वयं विकासकर्ता बनना होगा। स्वास्थ्य सेवा के उच्च-मूल्य वाले विशिष्ट क्षेत्रों में घरेलू क्षमता विकसित करना समय की मांग है। 3D प्रिंटिंग और बायो-सिरेमिक्स का यह अनूठा संगम न सिर्फ आयात निर्भरता घटाएगा, बल्कि भारतीय चिकित्सा विनिर्माण को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा।

इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से ऑर्थोपेडिक्स, ओरल केयर और दंत प्रत्यारोपण जैसे क्षेत्रों में भारतीय अस्पतालों और मरीजों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले कस्टमाइज्ड इम्प्लांट्स बेहद किफायती दरों पर देश में ही उपलब्ध हो सकेंगे।

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