नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और रूस के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिए व्यापक रणनीति पेश की है। उन्होंने दोनों देशों के औद्योगिक जगत से आह्वान किया कि वे वर्ष 2030 तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर और दोतरफा निवेश को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर तेजी से काम करें।
नई दिल्ली में रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के साथ ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान के 60 बिलियन डॉलर के व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने के लिए प्रतिवर्ष लगातार दहाई अंकों (डबल-डिजिट) की वृद्धि और ऊर्जा से इतर गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में निर्यात विस्तार अत्यंत आवश्यक है।
कृषि व खाद्य उत्पादों में उछाल, गैर-ऊर्जा निर्यात पर फोकस : केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि रूस के बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है:
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मांस व प्रसंस्कृत उत्पाद: निर्यात 36 मिलियन डॉलर से बढ़कर 97 मिलियन डॉलर पहुंचा (लगभग 170% की बढ़ोतरी)।
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समुद्री उत्पाद (मत्स्य): निर्यात 123 मिलियन डॉलर से बढ़कर 159 मिलियन डॉलर हुआ (30% वृद्धि)।
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सब्जियां व मसाले: खाद्य सब्जियों के निर्यात में 40% (54 मिलियन डॉलर) और चाय, कॉफी व मसालों में 13% (116 मिलियन डॉलर) का इजाफा हुआ।
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अनछुए क्षेत्र: फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर पार्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स ऐसे क्षेत्र हैं, जहां रूस बड़े पैमाने पर आयात करता है और भारत बड़े पैमाने पर निर्यात कर सकता है।
द्विपक्षीय निवेश संधि और स्थानीय मुद्रा में भुगतान प्रणाली : गोयल ने रेखांकित किया कि उन्नत विनिर्माण, खनन, रेलवे और नई तकनीकों से जुड़े 40 प्रोजेक्ट्स पर ‘भारत-रूस प्राथमिकता निवेश परियोजना तंत्र’ के जरिए निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक नई ‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ (BIT) को अंतिम रूप देने और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार वार्ता को शीघ्र पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही, स्थानीय व राष्ट्रीय मुद्राओं में सीधा भुगतान तंत्र मजबूत किया जा रहा है ताकि वित्तीय अड़चनों को दूर कर इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग के जरिए व्यापार लागत घटाई जा सके।
उद्योग जगत के सामने रखे 5 बड़े सूत्र:
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ठोस अनुबंध: दिल्ली से लौटने से पहले हर कारोबारी कम से कम एक नया समझौता (डील) और पार्टनरशिप तय करे।
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विविधीकरण: व्यापार को केवल ऊर्जा तक सीमित न रखकर फार्मा, केमिकल, टेक्सटाइल, एग्री-टेक और ऑटो पार्ट्स तक फैलाएं।
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मेक इन इंडिया: रूसी कंपनियां सिर्फ भारत में सामान बेचने के बजाय देश के आधुनिक प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक गलियारों में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करें।
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निवेशक बनें भारतीय उद्योग: भारतीय उद्यमी रूस में केवल विजिटर बनकर न जाएं, बल्कि वहां आईटी, हेल्थकेयर व इंजीनियरिंग में प्रत्यक्ष निवेशक बनकर उतरें।
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अड़चनें दूर करें अधिकारी: दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारी वीजा, मानक, लॉजिस्टिक्स व सर्टिफिकेशन से जुड़ी बाधाओं को तत्काल समाप्त करें।

