‘बच्चा गोद लेने में कोई शॉर्टकट नहीं’ : गैर-कानूनी एडॉप्शन रोकने के लिए दिल्ली सचिवालय में एकजुट हुए 200 हितधारक, CARA ने लॉन्च की फिल्म

नई दिल्ली। देश में गैर-कानूनी तरीके से बच्चे गोद लेने की अनैतिक और अवैध प्रथाओं पर पूर्ण अंकुश लगाने के उद्देश्य से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन ‘सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी’ (CARA) ने दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग और स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (SARA) के साथ मिलकर शुक्रवार को एक वृहद जागरूकता कार्यशाला आयोजित की।

दिल्ली सचिवालय के मुख्य सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस, स्वास्थ्य महकमे, न्यायपालिका, बाल कल्याण समितियों (CWC) और जमीनी स्तर के लगभग 200 प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में किसी भी तरह का शॉर्टकट किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act, 2015) का सीधा उल्लंघन है, जिससे बच्चों के विधिक अधिकार और सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ जाते हैं।

वैध गोद लेने की प्रक्रिया पर फिक्शन फिल्म लॉन्च : जागरूकता अभियान के तहत मंच से एक विशेष फिक्शन फिल्म रिलीज की गई, जो प्राधिकृत और पारदर्शी कानूनी प्रक्रियाओं के पालन के महत्व को रेखांकित करती है। सीएआरए की सीईओ भावना सक्सेना ने स्पष्ट किया कि बच्चों के अधिकार, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए पूरे बाल सुरक्षा तंत्र की सतर्कता अनिवार्य है।

वहीं दिल्ली महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव रश्मि सिंह ने कहा कि अस्पतालों के डॉक्टरों से लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक को गैर-कानूनी लेनदेन के प्रति संवेदनशील बनाना ही इस तंत्र को मजबूत करेगा।

तीन तकनीकी सत्रों में चिन्हित हुईं चुनौतियां :-

  • उभरती प्रवृत्तियां और कानूनी प्रतिक्रिया: गैर-कानूनी गोद लेने के नए तौर-तरीकों और राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की रणनीतियों पर मंथन।

  • संस्थानों की संयुक्त जवाबदेही: नर्सिंग होम, अस्पतालों, पुलिस अपराध शाखा और न्यायपालिका के बीच त्वरित समन्वय स्थापित करना ताकि संदिग्ध मामलों पर फौरन एक्शन हो सके।

  • जमीनी इकाइयों का सशक्तिकरण: सारा (SARA), सीडब्ल्यूसी (CWC), डीसीपीयू (DCPU) और बाल देखभाल संस्थानों (CCI) के बीच डेटा साझा करने और फील्ड स्तर पर समय रहते दखल देने का खाका खींचा गया।

सलाम बालक ट्रस्ट का नाटक और फील्ड अनुभव साझा  : कार्यशाला के दौरान डीसीपीओ अरुण शर्मा ने फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और संदिग्ध मामलों को पकड़ने के जमीनी अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम में डीएमआरसी सलाम बालक ट्रस्ट के कलाकारों ने बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा पर आधारित एक संवेदनशील नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। अंत में इंटरएक्टिव प्रश्नोत्तरी के जरिए सभी भागीदारों को गोद लेने की अनिवार्य कानूनी प्रक्रियाओं, अस्पताल स्तर पर जन्म पंजीकरण के नियमों और कानूनी एजेंसियों की जिम्मेदारियों का अभ्यास कराया गया।

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