दतिया। दतिया राजपरिवार की विरासत, किलों और अचल संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर चल रहे वर्षों पुराने विवाद में ग्वालियर हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। उच्च न्यायालय ने मामले में शामिल सभी विवादित परिसंपत्तियों, जिसमें दतिया और सेवढ़ा के ऐतिहासिक किले भी शामिल हैं, की खरीद-फरोख्त, नामांतरण और किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर अगली सुनवाई तक पूर्ण अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब आगामी आदेश तक इन संपत्तियों की कोई भी रजिस्ट्री या मालिकाना हक का कानूनी बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
साल 2019 से अदालत की दहलीज पर है विवाद : राजपरिवार की पैतृक विरासत के बंटवारे और कानूनी अधिकारों को लेकर 14 नवंबर 2019 को सिविल कोर्ट में दीवानी वाद दायर किया गया था:
● बिक्री पर रोक की मांग: विवादित संपत्तियों को तीसरे पक्ष को बेचे जाने से बचाने के लिए 23 जून 2022 को अंतरिम स्थगन (स्टे) का आवेदन पेश किया गया था।
● निचली अदालत का फैसला: मार्च 2026 में दतिया की निचली अदालत ने संपत्तियों की बिक्री पर रोक लगाने संबंधी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
अपील पर हाईकोर्ट ने सुनाया अंतरिम फैसला : निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हेमंत सिंह और गिरिराज सिंह की ओर से अप्रैल 2026 में ग्वालियर हाईकोर्ट में अपील दायर कर आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने विवादित संपत्तियों के हस्तांतरण पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश पारित किया, जो अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।
दतिया, सेवढ़ा और ग्वालियर तक फैला है संपत्तियों का दायरा : यह संपत्ति विवाद केवल दतिया जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा ग्वालियर स्थित संपत्तियों और ऐतिहासिक धरोहरों तक फैला हुआ है। अगली सुनवाई में हाईकोर्ट संपत्तियों के विभाजन, कानूनी उत्तराधिकार और मालिकाना हक से जुड़े अन्य मूल दस्तावेजों व कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगा।

