नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को सशक्त बनाने, पारगमन संपर्क को सुगम करने और सीमा पार अनधिकृत व्यापार की रोकथाम के उद्देश्य से आयोजित भारत-नेपाल अंतर-सरकारी उप-समिति (IGSC) की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में भारतीय दल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव उज्ज्वल कुमार घोष ने किया, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई नेपाल सरकार के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव बुद्ध बहादुर गुरुंग ने की।
व्यापार सुगमता और बाजार पहुंच विस्तार पर जोर : द्विपक्षीय संस्थागत तंत्र के तहत दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने आपसी व्यापार की अड़चनों को दूर करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा की:
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उत्पादों को व्यापक बाजार: कृषि जिंसों, डेयरी उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरणों और आयुष उत्पादों को एक-दूसरे के बाजारों में आसान पहुंच दिलाने पर विस्तृत सहमति बनी।
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डिजिटल कस्टम्स और नियमों की सख्ती: सीमा शुल्क स्वचालन (ऑटोमेशन), माल आगमन से पूर्व सूचनाओं के आदान-प्रदान और ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ प्रमाण पत्रों के इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन पर चर्चा हुई, ताकि अधिमान्य व्यापार समझौतों के दुरुपयोग और वाणिज्यिक धोखाधड़ी को पूरी तरह रोका जा सके।
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मानक एवं खाद्य सुरक्षा: दोनों पक्षों ने पौध स्वच्छता उपायों (फाइटोसेनेटरी), पादप संगरोध और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूपता मूल्यांकन में आपसी तकनीकी सहयोग बढ़ाने की सराहना की।
रेल-सड़क कनेक्टिविटी और लैंड पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा : पारगमन व्यापार को गति देने के लिए दोनों देशों ने सीमावर्ती बुनियादी ढांचे, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP), माल ढुलाई और भूमि-बंदरगाहों की परिचालन क्षमताओं का मूल्यांकन किया। चर्चा का मुख्य केंद्र मौजूदा सुविधाओं के प्रभावी उपयोग के जरिए परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना रहा, जिससे माल की आवाजाही में समय और लागत दोनों की बचत हो सके।
नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रमुख स्रोत होने के नाते भारत ने पड़ोसी देश के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में आगामी तकनीकी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर सहमति जताई।

