रतनगढ़ माता मंदिर में चल रहे निर्माण कार्य 5 अक्टूबर तक पूरे करने की डेडलाइन : शारदीय नवरात्र मेले की तैयारियों को लेकर कलेक्टर-एसपी ने लिया जायजा
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दतिया (सेवढ़ा)। प्रसिद्ध आस्था केंद्र रतनगढ़ माता मंदिर में 11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले ऐतिहासिक शारदीय नवरात्र मेले और दीपावली दौज मेले की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। श्रद्धालुओं की संभावित आवक को देखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े और पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने शुक्रवार को वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र तथा मंदिर परिसर का सघन निरीक्षण किया।

समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने दो-टूक निर्देश दिए कि मंदिर व मेला परिसर में जारी सभी विकास और निर्माण कार्य 5 अक्टूबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं; इसके बाद किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं चलेगा और मार्गों से मलबा हटाकर रास्ता पूरी तरह सुगम बनाया जाएगा।

​हाउसिंग बोर्ड, पीएचई और आरईएस को दी गई सख्त हिदायत:

​सीढ़ियां, धर्मशाला और यात्री सदन: माता के दरबार तक पहुंचने वाले मार्ग की सीढ़ियों के मरम्मत कार्य, सुलभ कॉम्प्लेक्स, किचन युक्त यात्री सदन, सामुदायिक भवन और धर्मशाला के निर्माण को हाउसिंग बोर्ड शीघ्र पूरा कराए।

पेयजल एवं पाइपलाइन नेटवर्क: पीएचई विभाग को दो नई पानी की टंकियों, पेयजल स्टैंड्स और मंदिर क्षेत्र के जबारे चबूतरे से लेकर नीचे बसई मलक मेला ग्राउंड तक नई पाइपलाइन बिछाने का काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।

भव्य स्वागत द्वार और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स: ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) को चरोखरा, भगुवापुरा प्रवेश मार्ग और कुंवर बाबा मंदिर के पीछे बेहट रोड पर तीन स्वागत द्वारों का निर्माण, पेवर्स ब्लॉक लगाने व जबारे चबूतरे के पास शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का काम समय-सीमा में खत्म करने को कहा गया।

​सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रबंधन पर विशेष जोर

पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की रूपरेखा तय करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए:

​भीड़ नियंत्रण और निगरानी: संपूर्ण मेला क्षेत्र में मजबूत बैरिकेडिंग, कंट्रोल रूम, लाउडस्पीकर सिस्टम और चप्पे-चप्पे पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों से पैनी नजर रखी जाएगी।

​यातायात डायवर्जन और पार्किंग: दूर-दराज से आने वाले वाहनों के लिए सुव्यवस्थित पार्किंग स्थल और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाएगा ताकि जाम की स्थिति न बने।

आपदा प्रबंधन व स्वास्थ्य सुविधाएं: सिंध नदी और घाटों के समीप प्रशिक्षित गोताखोर, एसडीआरएफ की राहत-बचाव टीमें, अग्निशामक वाहन (फायर ब्रिगेड), 24 घंटे कार्यशील एंबुलेंस और अस्थायी स्वास्थ्य शिविर तैनात रहेंगे।

​कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति, हाईमास्ट लाइट, अस्थायी शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सभी संबंधित विभागों के अधिकारी प्रतिदिन मौके पर पहुंचकर कार्यों की प्रगति की निगरानी करेंगे ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम व सुरक्षित दर्शन का वातावरण मिल सके।

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