मोबाइल के 15-अंकों के IMEI से छेड़छाड़ पर 3 साल तक की जेल और ₹50 लाख का जुर्माना : दूरसंचार विभाग ने जारी की सख्त चेतावनी

नई दिल्ली। देश में तेजी से फैलते डिजिटल इकोसिस्टम और 120 करोड़ (1,204.01 मिलियन) से अधिक सक्रिय वायरलेस मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल हैंडसेट के 15-अंकों के अंतरराष्ट्रीय पहचान कोड—IMEI (International Mobile Equipment Identity) के साथ अवैध छेड़छाड़ को डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार दिया है।

नए ‘दूरसंचार अधिनियम, 2023’ के तहत डिवाइस के IMEI नंबर को बदलने, मिटाने, क्लोन करने या छेड़छाड़ वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया गया है, जिसके लिए भारी जुर्माने व जेल का कड़ा कानूनी प्रावधान है।

​IMEI नंबर: क्यों है डिवाइस की रीढ़?

  • ​15-अंकों की विशिष्ट पहचान: IMEI किसी भी मोबाइल हैंडसेट का वैश्विक फिंगरप्रिंट होता है, जिससे दूरसंचार नेटवर्क पर उसकी सटीक पहचान होती है। डुअल-सिम फोन में दो अलग-अलग IMEI नंबर होते हैं।
  • ​TAC कोड की भूमिका: इसके शुरुआती 8 अंक ‘टाइप एलोकेशन कोड’ (TAC) होते हैं, जो वैश्विक संस्था GSMA द्वारा डिवाइस के मॉडल और ब्रांड को आवंटित किए जाते हैं।
  • ​ऐसे करें जांच: उपभोक्ता अपने फोन से *#06# डायल कर आसानी से अपना IMEI नंबर जान सकते हैं। इसके सत्यापन के लिए 14422 पर KYM <15-अंकों का IMEI> लिखकर एसएमएस भेजा जा सकता है या ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है।

​छेड़छाड़ पर सख्त कानूनी शिकंजा (टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023)

​सरकार ने साइबर धोखाधड़ी और चोरी के मोबाइल की री-ब्रांडिंग पर नकेल कसने के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान किए हैं:

​सजा और जुर्माना: धारा 42(3)(c) और 42(3)(e) के तहत किसी भी डिवाइस आइडेंटिफायर से छेड़छाड़ करने या फर्जी पहचान से सिम/डिवाइस हासिल करने पर 3 साल तक का कारावास, ₹50 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

​गैर-जमानती अपराध: धारा 42(7) के अंतर्गत यह अपराध संज्ञेय और पूरी तरह गैर-जमानती (Non-Bailable) बनाया गया है। ऐसे अपराध में सहायता करने वालों (धारा 42(6)) को भी मुख्य आरोपी के समान सजा मिलेगी।

​विनिर्माता, विक्रेता और नागरिकों के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस:

​विनिर्माता और आयातक: भारत में बनने वाले या आयात किए जाने वाले प्रत्येक दूरसंचार उपकरण का IMEI पहली बिक्री या परीक्षण से पूर्व सरकार के ‘डिवाइस सेतु–ICDR’ पोर्टल पर पंजीकृत कराना अनिवार्य है।

सेकंड-हैंड विक्रेता (रीसेलर्स): पुराने मोबाइल का व्यापार करने वालों को बिक्री से पहले सरकारी सेंट्रल डेटाबेस से डिवाइस की वैधता जांचनी होगी। ब्लैकलिस्टेड या क्लोन IMEI वाले फोन बेचना सख्त गैर-कानूनी है।

नागरिकों के लिए सतर्कता: फर्जी दस्तावेजों से सिम न लें, अपने नाम का सिम किसी अन्य को न सौंपें और कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (CLI/कॉलर आईडी) बदलने वाले अवैध ऐप्स से दूर रहें।

​फोन चोरी या गुम होने पर क्या करें?

  1. ​स्थानीय थाने में शिकायत: सबसे पहले निकटतम पुलिस थाने में गुमशुदगी/चोरी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं।
  2. ​डुप्लिकेट सिम लें: अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से उसी नंबर का सिम प्राप्त करें (TRAI नियमों के अनुसार नई सिम पर एसएमएस सेवाएं 24 घंटे बाद पूरी तरह सक्रिय होती हैं)।
  3. ​संचार साथी पोर्टल (CEIR) पर ब्लॉक कराएं: सिम एक्टिवेशन के बाद ‘संचार साथी’ पोर्टल पर जाकर पुलिस शिकायत व पहचान पत्र अपलोड कर हैंडसेट को ब्लॉक करने का अनुरोध दर्ज करें।
  4. ​रिकवरी पर अनब्लॉक: यदि डिवाइस वापस मिल जाती है, तो पुलिस को सूचित कर पोर्टल पर प्राप्त अनुरोध आईडी (Request ID) से फोन को पुनः सुरक्षित रूप से अनब्लॉक किया जा सकता है।

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