भोपाल/नई दिल्ली। देश के नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर और बड़े निवेश के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजधानी में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला ‘अर्बन चैलेंज फंड: निर्णय क्षमता, निवेश तत्परता एवं नगरीय परिवर्तन’ का आगाज हुआ। आवास एवं शहरी विकास निगम (हडको) के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में आयोजित इस कार्यशाला में मध्य प्रदेश के शीर्ष नगरीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। ‘साइटिस 2.0’ (CITIIS 2.0) के तहत हडको के मानव बस्ती अध्ययन संस्थान (HSMI) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का आधिकारिक उद्घाटन हडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) संजय कुलश्रेष्ठ ने किया।
नगरीय कायाकल्प और आधुनिक वित्त प्रबंधन पर केंद्रित सत्र
कार्यशाला के दौरान नगरीय अधोसंरचना के विकास और वित्तीय संसाधनों के विस्तार को लेकर कई तकनीकी पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है:
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वैकल्पिक वित्त पोषण के आधुनिक स्रोत: निकायों को केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर न रखकर पूंजी बाजार की सहभागिता, बाजार-आधारित उधारी (म्युनिसिपल बॉन्ड), और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) से जोड़ने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
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संसाधनों का प्रभावी उपयोग: कार्यशाला में विशेषज्ञों ने परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Asset Monetization) और लैंड वैल्यू कैप्चर (Land Value Capture) जैसे टूल्स के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने का व्यावहारिक रोडमैप प्रस्तुत किया।
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परियोजना तैयारी और निवेश तत्परता: प्रारंभिक विचार से लेकर वित्तीय समापन (Financial Closure) तक किसी बड़ी शहरी परियोजना को निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए व्यावहारिक केस स्टडीज के जरिए अधिकारियों का कौशल संवर्धन किया गया।
मध्य प्रदेश के इन प्रमुख शहरों का रहा प्रतिनिधित्व
मध्य प्रदेश के शहरों के सतत और सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रशिक्षण सत्र में राज्य का विस्तृत प्रतिनिधित्व रहा:
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5 प्रमुख स्मार्ट सिटीज: भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी शामिल हुए।
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निगम व प्रशासनिक तंत्र: नगर पालिक निगम भोपाल एवं ग्वालियर के प्रतिनिधियों के अलावा मध्य प्रदेश नगरीय विकास एवं आवास विभाग (UADD) तथा मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (MPUDC) के प्रमुख अधिकारियों ने सहभागिता की।
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उद्देश्य: प्रदेश के शहरों को वैश्विक मानकों के अनुरूप सतत, स्मार्ट और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाना, ताकि भविष्य की बुनियादी जरूरतों के लिए निजी और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं से निवेश आकर्षित किया जा सके।

