अन्नदाताओं को सरकार का बड़ा तोहफा : रबी सत्र 2027-28 के लिए सभी 6 फसलों की MSP में भारी बढ़ोतरी; कुसुम ₹675 तो सरसों ₹413

​नई दिल्ली। देश के करोड़ों अन्नदाताओं को आर्थिक सुरक्षा देने और उनकी आय में निरंतर इजाफा करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी 6 अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।

​केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता में कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए इसे देश के किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि उत्पादन लागत (A2+FL) पर 50 से 106 फीसदी तक का सुनिश्चित मुनाफा तय कर सरकार ने अन्नदाता को समृद्ध बनाने का अपना संकल्प दोहराया है।

​रबी फसलों की नई एमएसपी दरें: एक नजर में (सत्र 2027-28)

​कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई नई समर्थन मूल्य दरों में तिलहन और दलहन फसलों पर विशेष जोर दिया गया है:

लागत पर 50% से 106% तक का बंपर मुनाफा

​कृषि मंत्री ने बताया कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सरकार ने अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत या उससे अधिक का मार्जिन सुनिश्चित किया है:

  • ​गेहूं पर 106% का मार्जिन: किसानों को सबसे अधिक लाभ गेहूं पर 106% दिया गया है, जिससे गेहूं उत्पादक किसानों की जेब में सीधी बढ़ोतरी होगी।
  • ​सरसों पर 96% और मसूर पर 92% मार्जिन: खाद्य तेलों और दलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए सरसों पर 96% और मसूर पर 92% का भारी रिटर्न तय किया गया है।

​एमएसपी भुगतान तीन गुना बढ़ा, ₹8.36 लाख करोड़ पर पहुंचा

​यूपीए और एनडीए कार्यकाल के तुलनात्मक आंकड़े साझा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा:

  • ​वर्ष 2004-05 से 2013-14 के 10 वर्षों में 6 प्रमुख रबी फसलों की सरकारी खरीद पर किसानों को कुल ₹2.65 लाख करोड़ का भुगतान हुआ था।
  • ​वहीं, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान यह एमएसपी भुगतान तीन गुना से भी अधिक बढ़कर रिकॉर्ड ₹8.36 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है।

​‘राइस फेलो एरिया’ पहल: खाली खेतों में लहलहाएंगी दालें

​दलहन आयात पर विदेशी निर्भरता घटाने के लिए कृषि मंत्रालय ने खास रणनीति बनाई है:

  • ​60 लाख मीट्रिक टन आयात की भरपाई: देश में हर साल करीब 60 लाख मीट्रिक टन दालों का आयात करना पड़ता है। ‘राष्ट्रीय दलहन मिशन’ के तहत इस निर्भरता को खत्म करने के लिए मसूर की एमएसपी में ₹390 और चने में ₹83 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
  • ​धान कटने के बाद दलहन की बुआई: ‘राइस फेलो एरिया’ यानी धान की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में दलहनी फसलें लगाने के लिए किसानों को विशेष वित्तीय मदद, उच्च गुणवत्ता के प्रमाणित बीज और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

​जौ का आयात रोकने और तिलहन में आत्मनिर्भरता पर फोकस

  • ​जौ में ₹136 की बढ़ोतरी: घरेलू उत्पादन घटने के कारण 2025-26 में भारत को 1.13 लाख मीट्रिक टन जौ आयात करना पड़ा था। चूंकि जौ कम पानी में उगने वाली टिकाऊ फसल है, इसलिए भूजल संरक्षण और किसानों को प्रेरित करने के लिए इसकी एमएसपी ₹2,286 प्रति क्विंटल कर दी गई है।
  • ​कुसुम में सबसे बड़ा इजाफा (₹675): खाद्य तेलों का आयात घटाने और कम उपजाऊ व आदिवासी इलाकों में खेती करने वाले किसानों को संबल देने के लिए कुसुम (करड़ी) के समर्थन मूल्य में सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।

 

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