पीएम मोदी का ब्यूरोक्रेसी को मंत्र : ‘माई-बाप’ कल्चर खत्म, ‘नागरिक देवो भव’ ही 21वीं सदी के सुशासन का आधार

नई दिल्ली। 21वीं सदी के भारत की बदलती आकांक्षाओं और वैश्विक तकनीकी बदलावों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्रशासनिक चयन प्रणाली में आमूलचूल सुधारों का खाका प्रस्तुत किया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि चयन के मापदंड केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि उम्मीदवारों की अंतर्निहित प्रेरणा, दूरदर्शिता और जनसेवा के प्रति समर्पण का मूल्यांकन अनिवार्य रूप से होना चाहिए।

​प्रधानमंत्री ने अतीत की पुरातन ‘माई-बाप’ शासन प्रणाली को पूरी तरह त्यागने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक प्रशासन का मूल मंत्र ‘नागरिक देवो भव’ होना चाहिए, जहां हर नागरिक को ईश्वर स्वरूप मानकर उसकी सेवा सर्वोपरि रखी जाए।

​प्रशासन के 3 नए स्तंभ: जनहितैषी, सक्रिय और सुशासन : प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का नया प्रशासनिक ढांचा तीन आधारशिलाओं पर केंद्रित है:

  • ​सहानुभूति और संवेदनशीलता: नौकरशाही को केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम जनता पर कानूनों के प्रभाव का संवेदनशील और आलोचनात्मक विश्लेषण करना चाहिए।
  • ​समस्या का पूर्वानुमान: आयोगों को ऐसे पेशेवर चुनने होंगे जो समस्याओं के विकराल होने से पहले उनका सटीक पूर्वानुमान लगा सकें और अनावश्यक दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से समाधान तलाशें।
  • ​सक्रियता (Proactive Governance): जनसेवा के लिए सरकारी दफ्तरों की औपचारिकता से आगे बढ़कर नागरिकों के जीवन को सुगम (Ease of Living) बनाने के लिए तत्पर रहना होगा।

​परीक्षा चक्र छोटा करना ‘समानता सुधार’: वित्तीय बोझ से मिलेगी मुक्ति : भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार का सबसे बड़ा एजेंडा रखते हुए प्रधानमंत्री ने समयबद्धता पर विशेष जोर दिया:

  • ​लंबी प्रक्रियाओं पर रोक: प्रधानमंत्री ने कहा कि सालों तक खिंचने वाला परीक्षा चक्र मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों पर भारी वित्तीय बोझ डालता है। कोचिंग फीस, शहरों में किराए का कमरा और यात्रा खर्च युवाओं व उनके अभिभावकों की कमर तोड़ देता है।
  • ​गुणवत्ता से समझौता किए बिना गति: परीक्षा चक्र को छोटा करना केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि एक मूलभूत ‘समानता सुधार’ (Social Equity Reform) है, जिससे हर वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर मिल सकेंगे।

​साइबर वॉरफेयर, डीपफेक और एआई पूर्वाग्रह: नई सदी की चुनौतियां : भविष्य के अफसरों के सामने आने वाले खतरों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने आयोगों को भर्ती प्रक्रिया आधुनिक बनाने के निर्देश दिए:

  • ​नए तकनीकी व्यवधान: आज के दौर में अफसरों को केवल पारंपरिक कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि सूचना युद्ध (Information Warfare), डीपफेक, एल्गोरिथम पूर्वाग्रह (Algorithm Bias) और क्लाइमेट जस्टिस जैसी जटिल वैश्विक चुनौतियों से निपटना है।
  • ​दूरदर्शिता की परीक्षा: चयन प्रक्रिया में जटिल समस्या-समाधान (Complex Problem Solving) और रणनीतिक दूरदर्शिता के परीक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Share

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter