नई दिल्ली। हाथ से कते और बुने जाने वाले पारंपरिक वस्त्र ‘खादी’ ने अब आधुनिक जीवनशैली और अंतरराष्ट्रीय फैशन मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। खादी और ग्रामोद्योग (KVI) ने न केवल ग्रामीण इलाकों में लाखों परिवारों को स्थायी आजीविका दी है, बल्कि यह महिला सशक्तीकरण और सतत पर्यावरण विकास का एक सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। वर्तमान में देश भर के लगभग 5 लाख खादी कारीगरों में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है, जो अगरबत्ती, शहद, हस्तनिर्मित कागज और परिधान निर्माण के जरिए सीधे आर्थिक स्वावलंबन हासिल कर रही हैं।
अहमदाबाद स्थित उद्यमिता विकास संस्थान (EDII) के हालिया मूल्यांकन अध्ययन के अनुसार, सरकार द्वारा मजदूरी वृद्धि, आधुनिक टूलकिट और विपणन सहायता दिए जाने के बाद इस क्षेत्र से जुड़े 75 प्रतिशत से अधिक कारीगरों की आय में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
फैशन की मुख्यधारा में खादी: 2,100 से अधिक नए डिजाइन तैयार : युवा पीढ़ी की पसंद को ध्यान में रखते हुए खादी के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है:
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एनआईएफटी (NIFT) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: दिल्ली स्थित निफ्ट के खादी उत्कृष्टता केंद्र ने विभिन्न श्रेणियों में 2,129 नए खादी डिजाइन संग्रह तैयार किए हैं।
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डेनिम से लेकर योगा वियर: खादी डेनिम, आधुनिक शर्ट-ट्राउजर, ब्राइडल वियर और 710 नए उत्पादों वाली ‘नवयुग खादी’ को बाजार में उतारा गया है। इसके अलावा वेलनेस और योग के लिए विशेष परिधान संग्रह ‘स्वधा’ भी पेश किया गया है।
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स्थानीय पहचान को जीआई टैग: आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध ‘पोंडुरु खादी’ को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिलने से इसके महीन सूती धागे और कताई-बुनाई की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान मिली है।
पर्यावरण अनुकूल उत्पादन और हरित ऊर्जा संयंत्र : खादी का उत्पादन शून्य या बेहद कम कार्बन उत्सर्जन और न्यूनतम पानी की खपत पर आधारित है:
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सौर ऊर्जा से चल रहे संयंत्र: केवीआईसी के सेंट्रल स्लीवर प्लांट्स का आधुनिकीकरण किया गया है। कर्नाटक के चित्रदुर्ग और केरल के कुत्तूर स्थित संयंत्र पूरी तरह आधुनिक होकर शुरू हो चुके हैं। चित्रदुर्ग प्लांट अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा सौर ऊर्जा से प्राप्त कर रहा है।
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बिना केमिकल के प्राकृतिक रंगीन कपास: आईसीएआर-सीआईआरसीओटी (ICAR-CIRCOT) के सहयोग से प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की किस्में उगाने पर काम चल रहा है, जिससे पारंपरिक रंगाई में होने वाले जल प्रदूषण और रसायनों के उपयोग को रोका जा सके।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक: न्यूयॉर्क तक पहुंचा नेटवर्क : प्राकृतिक और हस्तनिर्मित कपड़ों की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच खादी को निर्यात मंचों से जोड़ा जा रहा है:
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खादी संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के व्यापार पोर्टल पर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EPC) के रूप में पंजीकरण कराया गया है।
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हाल ही में आगरा में आयोजित ब्रिक्स एमएसएमई फोरम (BRICS MSME Forum) में पोंडुरु खादी, बंगाल की मलमल और कस्तूरी कपास का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के समक्ष प्रदर्शन किया गया।

