नई दिल्ली। सीमा पार से होने वाली टेलीकॉम धोखाधड़ी और फर्जी कॉल पर प्रभावी कार्रवाई के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के उस प्रस्ताव का स्वागत किया है, जिसमें धोखाधड़ी वाले संचार पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न देशों, नियामकों, टेलीकॉम कंपनियों और तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर संयुक्त परीक्षण करने की बात कही गई है।
डॉ. पेम्मासानी ने यह बात इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के दौरान आयोजित ITU गोलमेज सम्मेलन में कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में इस आयोजन का उद्घाटन किया था। मंत्री ने कहा कि आज केवल लोगों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है।
2024 में 22,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान : डॉ. पेम्मासानी के अनुसार, संगठित और सीमा पार से संचालित होने वाली साइबर धोखाधड़ी एक गंभीर चुनौती बन गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में भारतीयों को इस तरह की धोखाधड़ी के कारण 22,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। इसमें पहचान छिपाकर ठगी करना, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धोखाधड़ी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई नकली आवाज और डीपफेक जैसी तकनीकें शामिल हैं।
मंत्री ने कहा कि चूंकि टेलीकॉम नेटवर्क और धोखाधड़ी करने वाले गिरोह सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, इसलिए उनसे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित व्यवस्था बनाना जरूरी है।
फर्जी मोबाइल कनेक्शन और धोखाधड़ी रोकने के लिए पांच स्तरीय रणनीति : भारत ने धोखाधड़ी वाले संचार पर रोक लगाने के लिए तकनीक, निगरानी और नागरिकों की भागीदारी पर आधारित पांच स्तरीय रणनीति अपनाई है। इसमें फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल की पहचान कर उन्हें वास्तविक समय में रोकना, AI आधारित ASTR टूल से संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान करना, संचार साथी के जरिए नागरिकों को जागरूक और सहभागी बनाना, डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर सूचनाएं साझा करना तथा ठगी के नए तरीकों के अनुसार सुरक्षा उपाय विकसित करना शामिल है।
82 लाख से अधिक फर्जी कनेक्शन बंद : सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, ASTR टूल की मदद से अब तक 82 लाख से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं। वहीं, संचार साथी ऐप को लगभग 2.5 करोड़ बार डाउनलोड किया गया है।
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के माध्यम से 1,600 से अधिक संस्थाएं जुड़ी हैं। इनमें टेलीकॉम ऑपरेटर, बैंक और कानून लागू करने वाली एजेंसियां शामिल हैं। इसके अलावा, वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक ने पिछले 15 महीनों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित वित्तीय नुकसान को रोकने में सहायता की है।
अंतरराष्ट्रीय कॉल की पहचान के लिए साझा मानकों पर जोर : डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि घरेलू स्तर पर उठाए गए कदमों के बावजूद सीमा पार से होने वाली धोखाधड़ी को पूरी तरह रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने अलग-अलग देशों के नेटवर्क पर कॉल करने वाले की पहचान का डिजिटल सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए ITU मानकों की अहमियत बताई।
उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इच्छुक देश चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय टेलीकॉम मार्गों पर संयुक्त परीक्षण शुरू कर सकते हैं। इन परीक्षणों में विभिन्न नेटवर्क तकनीकों को शामिल किया जाए और उनके अनुभवों के आधार पर मानकों को बेहतर बनाया जाए। भारत ने इस पहल में सक्रिय योगदान देने की तत्परता भी जताई।
6G नेटवर्क में शुरुआत से ही सुरक्षा पर जोर : मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे 6G तकनीक विकसित हो रही है, नेटवर्क के डिजाइन और संचालन में भरोसे तथा सुरक्षा को शुरुआती चरण से ही शामिल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, धोखाधड़ी वाले संचार से निपटने के लिए तकनीक, प्रभावी नियमन और वैश्विक सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत अब केवल धोखाधड़ी होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे पहले ही रोकने की दिशा में काम कर रहा है। अगला कदम राष्ट्रीय प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़कर डिजिटल संचार के लिए अधिक भरोसेमंद व्यवस्था तैयार करना है।

