दतिया। जिले में राजस्व कार्यों और विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर चल रही खींचतान के बीच सोमवार को दो महिला पटवारियों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। दोनों महिला कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही रास्ते में अचेत होकर गिर पड़ीं, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने इस घटना के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बनाए जा रहे अत्यधिक मानसिक दबाव और कार्यबोझ को जिम्मेदार ठहराया है।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम सोनाली राजपूत, तहसीलदार सहित प्रशासनिक अमला जिला चिकित्सालय पहुंचा और दोनों कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। फिलहाल डॉक्टरों की देखरेख में दोनों का उपचार जारी है।
समीक्षा बैठक के लिए बुलाई गई थीं दोनों महिला कर्मी : जानकारी के अनुसार, सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पटवारियों की आवश्यक समीक्षा बैठक बुलाई गई थी:
➝ रास्ते में बिगड़ी तबीयत: गुजररा हल्का में पदस्थ रेनू श्रीवास्तव और चिरौली हल्का में पदस्थ सुरभि श्रीवास्तव (दोनों परिवीक्षाधीन पटवारी) बैठक में शामिल होने के लिए जा रही थीं। कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने से ठीक पहले ही अत्यधिक तनाव के चलते दोनों बेहोश हो गईं।
➝ अस्पताल में भर्ती: सहकर्मियों ने उन्हें तुरंत जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
पटवारी संघ का आरोप: अत्यधिक दबाव और टर्मिनेशन का खौफ : पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष नीरज शर्मा ने घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों से अमानवीय दबाव में काम कराया जा रहा है:
➝ स्वामित्व योजना व अन्य कार्यों का बोझ: संघ का आरोप है कि स्वामित्व योजना सहित कई विभागीय ऑनलाइन पोर्टल और सर्वे कार्यों का अत्यधिक लक्ष्य निर्धारित कर मैदानी अमले पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
➝ बर्खास्तगी आदेश वापस लेने की मांग: प्रांतीय आह्वान का हवाला देते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि संगठन ने पूर्व में ही निर्णय लिया था कि जब तक निलंबित साथियों की बहाली और सेवा समाप्त (टर्मिनेशन) किए गए पटवारियों के आदेश निरस्त नहीं होते, तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
➝ लिखित आदेश का इंतजार: शासन स्तर से अब तक बहाली का कोई औपचारिक पत्र जारी न होने के कारण प्रांतीय नेतृत्व ने रविवार को आंदोलन जारी रखने का नया परिपत्र जारी किया था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर लगातार दबाव डाला जा रहा था, जिसके चलते यह स्थिति बनी।
पटवारी संघ ने साफ किया है कि जब तक सेवा समाप्ति के आदेश वापस नहीं लिए जाते और कार्यस्थल पर दबावमुक्त वातावरण नहीं बनता, तब तक उनका चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।

