भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों के आर्थिक संरक्षण, औद्योगिक क्रांति और क्षेत्रीय विकास को रफ्तार देने के लिए गुरुवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की अहम बैठक संपन्न हुई। कैबिनेट ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कुल ₹27,050 करोड़ से अधिक के ऐतिहासिक प्रस्तावों पर मुहर लगाई।
अन्नदाताओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देने के लिए केंद्र की ‘पीएम-आशा’ योजना के तहत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की मंजूरी दी। इसके अलावा, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए शत-प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाली ‘जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी’ के गठन को हरी झंडी दी गई।
1. सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना की मुख्य शर्तें:
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पंजीयन अनिवार्य: योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना होगा।
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मंडी विक्रय अवधि: अधिसूचित मंडियों में सोयाबीन विक्रय की अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तय की गई है।
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पारदर्शी मॉडल रेट व्यवस्था: मंडियों के 14 दिनों के भारित औसत से मॉडल रेट तय होगा। यदि मंडी में सोयाबीन एमएसपी से कम लेकिन मॉडल रेट से अधिक बिकती है, तो अंतर की राशि किसान को मिलेगी। यदि बिक्री मॉडल रेट या उससे नीचे होती है, तो किसान को एमएसपी और मॉडल रेट के अंतर का भुगतान सीधे बैंक खाते में (DBT) किया जाएगा।
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₹1500 करोड़ की साख सीमा: भुगतान मंडी बोर्ड के मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगा। आवश्यकता पड़ने पर राज्य शासन मंडी बोर्ड को ₹1,500 करोड़ की ब्याज-मुक्त क्रेडिट लिमिट देगा।
2. जबलपुर-इंदौर कॉरिडोर के लिए बनेगी स्पेशल कंपनी (SPV):
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कंपनी का स्वरूप: ‘जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड’ पूरी तरह मप्र शासन के नियंत्रण में रहेगी।
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₹100 करोड़ की पूंजी: राज्य सरकार ₹100 करोड़ की शुरुआती चुकता पूंजी देगी। गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे।
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कार्यों का दायरा: कंपनी सड़क निर्माण नहीं करेगी, बल्कि कॉरिडोर से सटे आर्थिक व औद्योगिक हबों में जमीन अधिग्रहण, मास्टर प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क, फूड/एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, आईटी पार्क और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) विकसित करेगी।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख नीतिगत व वित्तीय निर्णय:
| विभाग / क्षेत्र | स्वीकृत राशि / निर्णय | मुख्य प्रभाव |
| सिंचाई परियोजनाएं | ₹3,076.37 करोड़ | बुरहानपुर (झिरमिटी मध्यम), रायसेन (बारना आधुनिकीकरण), मंदसौर (कयामपुर-सीतामऊ) व सिंगरौली (चितरंगी) में सूक्ष्म सिंचाई नेटवर्क का विस्तार। |
| विधि एवं विधायी कार्य | ₹15,557.35 करोड़ | 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-31) में अधीनस्थ न्यायालयों, न्यायिक कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, ई-कोर्ट्स कम्प्यूटराइजेशन व नवीन कोर्ट भवनों का निर्माण। |
| सांदीपनि विद्यालय परिवहन | ₹241.88 करोड़ | जनजातीय विभाग के 94 विद्यालयों में छात्रों का परिवहन भत्ता ₹10,000 से बढ़ाकर ₹21,000 प्रतिवर्ष किया गया (5% वार्षिक वृद्धि सहित)। |
| आयुष विभाग | ₹5,232.62 करोड़ | राष्ट्रीय आयुष मिशन (₹1,697.62 करोड़) और आयुष कॉलेज-अस्पताल अम्ब्रेला योजना (₹3,535 करोड़) के तहत 7 नए आयुर्वेद, 1 होम्योपैथी व 1 यूनानी कॉलेज का संचालन। |
| स्कूल अधोसंरचना | ₹2,875.20 करोड़ | 7,122 हाई/हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, फर्नीचर, स्मार्ट इंटरएक्टिव पैनल और सुरक्षा कैमरों की स्थापना। |
| महिला एवं बाल विकास | 24 नए पदों का सृजन | 4 नवगठित जिलों—निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 24 नवीन पद स्वीकृत। |
| राज्य सूचना आयोग | ₹71.81 करोड़ | सूचना आयोग की स्थापना, अधिकारियों-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और विभागीय संपत्तियों के रख-रखाव के लिए प्रावधान। |
