दतिया (सेवढ़ा)। शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर अंचल के प्रसिद्ध सिद्धपीठ रतनगढ़ माता मंदिर में आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। महानवमी के दिन मां रतनगढ़ वाली के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से लगभग 2 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसके साथ ही नौ दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में कुल श्रद्धालुओं का आंकड़ा 10 से 12 लाख के पार पहुंच गया। माता के जयकारों और घंटी-घड़ियालों की ध्वनि से पूरा विंध्य पर्वत परिक्षेत्र और सिंध नदी का तट गुंजायमान रहा।
लाखों की तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सहूलियत और कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस बल दिन-रात मुस्तैद नजर आया।
कलेक्टर और एसपी ने संभाली कमान, छावनी में तब्दील रहा मेला परिसर : मेला क्षेत्र में व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने के लिए आला अधिकारियों ने सीधे ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभाला:
उच्चाधिकारियों की सीधी निगरानी: कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के संयुक्त निर्देशन में समूचे मंदिर परिसर, सिंध नदी पुल, वन क्षेत्र और पार्किंग स्थलों पर बहुस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया गया था।
पॉइंट-टू-पॉइंट पुलिस बल की तैनाती: श्रद्धालुओं की कतारों को व्यवस्थित रखने के लिए बैरिकेडिंग के साथ-साथ जगह-जगह पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक दंडाधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी लगाई गई थी। सीसीटीवी कैमरों और वॉच टावरों के जरिए पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
सिंध नदी के तट से लेकर गर्भगृह तक दिखी अटूट श्रद्धा : नवरात्रि के दौरान उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की गई:
सुगम दर्शन व्यवस्था: मुख्य मंदिर से कई किलोमीटर पहले ही वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग में रोक दिया गया, ताकि पैदल आने वाले श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रशासनिक तालमेल से टली अव्यवस्था: श्रद्धालुओं के विशाल जनसैलाब के बावजूद प्रशासन और पुलिस के आपसी समन्वय के चलते दर्शन व्यवस्था बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से संपन्न हुई। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस, आपात चिकित्सा दल और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्थाएं भी मार्ग पर सक्रिय रहीं।

