12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का आगाज : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बोले—’ग्लोबल साउथ की आवाज को ठोस नीतियों में बदलना जरूरी’ !

​नई दिल्ली। संसद भवन के ऐतिहासिक संविधान सदन में सोमवार को 12वें ब्रिक्स (BRICS) संसदीय फोरम-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्य और साझेदार देशों की संसदों से वैश्विक शांति, जन-केंद्रित विकास, सततता और बहुपक्षीय सहयोग को नई गति देने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स की वास्तविक सफलता केवल बैठकों और विमर्श से नहीं, बल्कि नीतियों के धरातल पर उतरने वाले ठोस परिणामों से आंकी जाएगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स देशों से आए संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात कर वैश्विक सहयोग पर संवाद किया।

​सम्मेलन की थीम “जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को सुदृढ़ बनाना” (Strengthening Parliaments for People-Centric Development) रखी गई है। दो दिवसीय फोरम के दौरान सदस्य देशों के विधायी प्रतिनिधि चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और सततता (Sustainability)—पर व्यापक विमर्श कर साझा रोडमैप तैयार कर रहे हैं।

​ग्लोबल साउथ की आकांक्षाएं और संसदीय कूटनीति की शक्ति : ​लोकसभा अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि मौजूदा दौर में जब दुनिया युद्ध, आर्थिक विषमता, व्यापारिक गतिरोध और जलवायु परिवर्तन के संकट से जूझ रही है, तब संसदीय कूटनीति की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है:

  • ​विमर्श से आगे की रणनीति: श्री बिरला ने कहा कि ब्रिक्स ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं को सशक्त ढंग से उठाने का मंच है। अब समय आ गया है कि इन साझा प्राथमिकताओं को व्यावहारिक कानूनों और बजट प्रावधानों में बदला जाए।
  • ​शांतिपूर्ण समाधान का माध्यम: संसदें विभिन्न देशों के बीच आपसी विश्वास बहाल करने, कूटनीतिक तनाव कम करने और वैश्विक टकरावों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में सेतु का काम कर सकती हैं।

​पर्यावरण-विकास संतुलन और युवा शक्ति पर जोर : फोरम को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने भारतीय दर्शन का हवाला देते हुए विकास और पर्यावरण को एक-दूसरे का पूरक बताया:

  • ​सतत विकास नीतियां: आर्थिक प्रगति की नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखें और आने वाली पीढ़ियों के हितों की रक्षा करें।
  • ​युवाओं को नीति-निर्माण से जोड़ें: उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकी ज्ञान से लैस युवाओं की आकांक्षाओं को संसदों में समुचित स्थान मिलना चाहिए, ताकि उनकी ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार में हो सके।
  • ​समाधानों का इकोसिस्टम: प्रधानमंत्री मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को वैश्विक चुनौतियों के समाधान का केंद्र बनना होगा, जहां संस्थागत नवाचार और पारदर्शिता से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए।

​उद्घाटन सत्र में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोकसभा महासचिव तथा ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ सांसदों, राजनयिकों और विधायी विशेषज्ञों ने शिरकत की।

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