दतिया। घर में अकेली नाबालिग बालिका के साथ मर्यादा भंग करने और दुर्व्यवहार के गंभीर मामले में दतिया के विशेष पॉक्सो न्यायालय ने त्वरित न्याय का उदाहरण पेश करते हुए अभियुक्त को तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश मंजूषा तेकाम की अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर 22 वर्षीय युवक को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम सहित सुसंगत विधिक धाराओं में दोषी करार देते हुए कुल ₹3,000 का अर्थदंड भी अधिरोपित किया है।
✤ खेत पर गया था परिवार, पानी पीने के बहाने घर में घुसा था आरोपी : विशेष लोक अभियोजक (सरकारी वकील) संचिता अवस्थी के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार रहा:
घटना का विवरण: मामला पंडोखर थाना अंतर्गत एक ग्रामीण अंचल का है। 25 अप्रैल 2025 की दोपहर करीब 1 बजे पीड़िता अपने घर पर अकेली थी, जबकि परिजन खेती-किसानी के सिलसिले में खेतों पर गए हुए थे।
बहाने से प्रवेश व दुर्व्यवहार: इसी दौरान गांव का निवासी कमलेश केवट (उम्र 22 वर्ष) पेयजल मांगने के बहाने घर की देहरी में दाखिल हुआ। बालिका द्वारा पानी देने के पश्चात जब उसने युवक को जाने के लिए कहा, तो आरोपी ने अनैतिक इरादे से पीड़िता का मोबाइल छीनकर रख लिया और बलपूर्वक हाथ पकड़कर छेड़छाड़ की।
चीख-पुकार सुनकर दौड़ी पड़ोसन: पीड़िता द्वारा शोर मचाने पर पास में रहने वाली एक महिला दौड़कर मौके पर पहुंची, जिसे देखते ही आरोपी वहां से भाग निकला। परिजनों के घर लौटने पर पीड़िता ने आपबीती सुनाई, जिसके बाद परिजनों ने पंडोखर थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई।
पंडोखर पुलिस ने पेश किया चालान, अदालत ने पाया दोषी : थाना पंडोखर पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए आरोपी कमलेश केवट के विरुद्ध छेड़छाड़ और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर वैज्ञानिक विवेचना पूरी की और अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया:
सजा व जुर्माना: विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों और विधिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराया।
विधिक प्रावधान: न्यायालय ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, भादंवि की धारा 354 एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 7/8 के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास और ₹3,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

