विदेशी बाजार तक पहुंच होगी आसान : सरकार ने ई-कॉमर्स निर्यात के लिए नया ढांचा किया लागू, MSME और कारीगरों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने विदेश व्यापार नीति (FTP) 2023 के तहत इन्वेंट्री-आधारित सीमा पार ई-कॉमर्स निर्यात (Cross-Border E-Commerce Export) के लिए नया नियामक ढांचा लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि इससे भारत के MSME, कारीगर, स्टार्टअप और स्थानीय निर्माता वैश्विक बाजार तक अधिक संगठित और आसान तरीके से पहुंच बना सकेंगे। साथ ही निर्यात प्रक्रिया में पारदर्शिता, समय पर भुगतान और नियामकीय निगरानी भी सुनिश्चित होगी।

अब पंजीकृत निर्यातक के जरिए होगा निर्यात : नई व्यवस्था के तहत केवल पंजीकृत निर्यातक (Exporter on Record – EOR) के माध्यम से ही इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स निर्यात किया जा सकेगा। विदेशी ग्राहक का ऑर्डर मिलने के बाद EOR भारतीय विक्रेता से सामान खरीदेगा, अपने नाम से निर्यात करेगा और सीमा शुल्क, दस्तावेज़, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स तथा गंतव्य देश के नियमों के पालन की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा।

इससे भारतीय विक्रेताओं को जटिल निर्यात प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और वे अपने उत्पादों के निर्माण व गुणवत्ता सुधार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

MSME और कारीगरों को मिलेगा सीधा लाभ : सरकार का मानना है कि नया ढांचा छोटे व्यापारियों, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक पहुंच दिलाने में मदद करेगा। उन्हें संगठित सप्लाई चेन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और वैश्विक ग्राहकों तक पहुंच का लाभ मिलेगा।

साथ ही विदेशी खरीदार से भुगतान आने या न आने की स्थिति में भी निर्धारित समय सीमा के भीतर भारतीय विक्रेताओं को भुगतान सुनिश्चित करने का प्रावधान रखा गया है।

घरेलू बाजार में नहीं बिक सकेगा निर्यात का सामान : नई नीति में कई सुरक्षा प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। निर्यात के लिए सामान की खरीद केवल कन्फर्म ऑर्डर मिलने के बाद ही की जा सकेगी। निर्यात के लिए रखा गया माल घरेलू बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा तथा प्रत्येक शिपमेंट का डिजिटल रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा, जिससे हर उत्पाद की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा लौटाए गए या अस्वीकृत सामान के पुनः निर्यात, वापसी अथवा निस्तारण के लिए भी स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

पारदर्शिता और निगरानी पर रहेगा विशेष जोर : सरकार ने इस ढांचे में डिजिटल रिकॉर्ड, वार्षिक अनुपालन प्रमाणन और ऑनलाइन निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी अनिवार्य की हैं। विक्रेताओं को अपने उत्पाद की अंतिम बिक्री कीमत, ऑर्डर की स्थिति और शिपमेंट ट्रैकिंग जैसी जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

Share

Share on whatsapp
Share on facebook
Share on twitter