रेडक्रॉस दतिया की प्रेरणादायी पहल : ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत मुक्तिधाम में चलाया स्वच्छता अभियान , रोपे पौधे !

दतिया। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी मध्यप्रदेश राज्य शाखा के आह्वान पर संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत जिला शाखा दतिया द्वारा गुरुवार को सामाजिक सरोकार और जनसेवा की अनूठी मिसाल पेश की गई। रेडक्रॉस दल ने शहर के सेवढ़ा चुंगी स्थित मुक्तिधाम परिसर में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाने के साथ-साथ सघन पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया। संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों और स्वयंसेवकों ने किसी औपचारिकता के बिना स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर श्रमदान किया और पूरे मुक्तिधाम परिसर के कोने-कोने को स्वच्छ बनाया।

वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की रही सक्रिय सहभागिता : इस सेवा कार्य में रेडक्रॉस दतिया के सचिव पुनीत तिलवानी, मध्यप्रदेश राज्य प्रबंध समिति सदस्य अमित कुमार अग्रवाल, अनुभव राय, सुनील सोनी, रवि बघेल, आलोक भटनागर, मनोज हिंदुजा, सुमित सेन और राजेश कट्रोलिया सहित अनेक स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

श्रमदान कर हटाया कचरा, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प : अभियान के अंतर्गत मुक्तिधाम परिसर में बिखरे कचरे, सूखे पत्तों और अनुपयोगी झाड़ियों को साफ किया गया !

सघन साफ-सफाई : स्वयंसेवकों ने परिसर में श्रमदान कर यह संदेश दिया कि सार्वजनिक और अंतिम विश्राम स्थलों की स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।

पौधरोपण व संरक्षण : स्वच्छता के उपरांत परिसर में छायादार एवं फलदार पौधे रोपे गए। उपस्थित सदस्यों ने केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर उनके संवर्धन, सुरक्षा और नियमित जल-संरक्षण का संकल्प लिया।

पर्यावरण चेतना : संस्था के सदस्यों ने रेखांकित किया कि स्वच्छता और हरित आवरण का विस्तार किसी एक दिन का अभियान न होकर दैनिक जीवन की नियमित आदत होना चाहिए।

स्वच्छता को बताया सामूहिक जिम्मेदारी – अमित कुमार अग्रवाल :- मध्यप्रदेश राज्य प्रबंध समिति सदस्य व युवा समाजसेवी अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छता केवल स्वास्थ्य और बीमारियों से बचाव तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हम सभी की सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है।

यदि प्रत्येक नागरिक अपने परिवेश को स्वच्छ रखने के प्रति सजग हो जाए, तो अनेक बीमारियों और सामाजिक विसंगतियों से समाज को सहज ही सुरक्षित रखा जा सकता है। अंतिम विश्राम स्थल जैसे संवेदनशील और शांत परिसर में सेवा कार्य करने से आत्मिक संतोष और सामाजिक समरसता की भावना मजबूत होती है।

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