नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की विशिष्ट पहचान और समृद्ध कृषि विरासत का प्रतीक ‘बालाघाट चिन्नौर’ चावल अब वैश्विक फलक पर अपनी खुशबू बिखेर रहा है। देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय ‘भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2026’ (BIRC-2026) में चिन्नौर चावल ने देश-विदेश के व्यापारियों और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत चिन्हित इस अनूठे सुगंधित चावल को प्रमोट करने के लिए मध्य प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी बोर्ड) भोपाल तथा कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा सम्मेलन में विशेष प्रदर्शनी स्टॉल लगाया गया है। 23 से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया भर के शीर्ष चावल आयातक, निर्यातक और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
एफपीओ के जरिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संवाद : इस अंतरराष्ट्रीय महामंच पर बालाघाट के धान उत्पादक किसानों का सीधा प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है:
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स्थानीय किसानों की सशक्त मौजूदगी: सम्मेलन में बालाघाट का प्रतिनिधित्व ‘लालबर्रा चिन्नौर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ कर रही है। एफपीओ के अध्यक्ष ईशुपाल चौहान तथा संचालक मंडल सदस्य राधेलाल पटले ने स्टॉल पर आने वाले राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को चिन्नौर की खूबियों से रूबरू कराया।
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बी2बी बैठकों से निर्यात के नए रास्ते: किसान उत्पादक संगठन के पदाधिकारियों ने शीर्ष भारतीय निर्यातकों और विदेशी बायर्स के साथ सीधे बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) संवाद किया। इससे बिचौलियों के बिना सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिन्नौर की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त होगा, जिसका सीधा लाभ जिले के धान किसानों की आय में वृद्धि के रूप में दिखेगा।
वर्ष 2021 में मिला था जीआई टैग, अब वैश्विक बाजार की बारी : बालाघाट का चिन्नौर चावल अपनी प्राकृतिक मनमोहक महक, पकाने के बाद दाने की कोमलता और प्राकृतिक मिठास के लिए देश भर में विख्यात है:
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विशिष्ट पहचान: पारंपरिक और जैविक पद्धति से उपजाए जाने वाले इस दुर्लभ चावल को वर्ष 2021 में आधिकारिक रूप से भौगोलिक उपदर्शन (GI Tag) प्रदान किया गया था।
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औषधीय व पारंपरिक महत्व: भारत मंडपम में आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने न केवल इसके स्वाद और बनावट की सराहना की, बल्कि इसके पारंपरिक और औषधीय गुणों में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई।

