भुवनेश्वर में होगी 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भारत की अध्यक्षता में शिक्षा सहयोग पर होगा मंथन

नई दिल्ली | भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के तहत ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में शुक्रवार को 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी इस बैठक में भारत का नेतृत्व करेंगे। बैठक में सदस्य देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, कौशल विकास, शोध एवं नवाचार और अकादमिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी।

वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति : बैठक से पहले 5 अगस्त को भुवनेश्वर में BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों (Senior Officials Meeting) की तीसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिकारियों ने शिक्षा मंत्रियों की बैठक में पेश किए जाने वाले घोषणापत्र के मसौदे पर चर्चा कर विभिन्न बिंदुओं पर आम सहमति बनाने की दिशा में विचार-विमर्श किया।

इन प्रमुख विषयों पर रहेगा फोकस : बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। इनमें

  • प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा (ECCE)
  • तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET)
  • शोध एवं नवाचार में सहयोग
  • शैक्षणिक योग्यताओं की आपसी मान्यता
  • अकादमिक नेतृत्व को बढ़ावा
  • पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों पर सहयोग

जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।

शिक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर : बैठक के दौरान सदस्य देशों ने संस्थागत सहयोग बढ़ाने, संयुक्त शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर भी चर्चा की। साथ ही, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

घोषणापत्र को अंतिम रूप देने की तैयारी : वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में शिक्षा मंत्रियों के संयुक्त घोषणापत्र के मसौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। अब इस मसौदे पर शुक्रवार को होने वाली 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक में चर्चा और मंजूरी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि यह बैठक BRICS देशों के बीच शिक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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