नई दिल्ली : केंद्र सरकार के आग्रह पर तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और पंजाब ने भी ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे महामारी घोषित कर दिया है। राजस्थान और हरियाणा पहले ही इसे महामारी घोषित कर चुके हैं, जबकि दिल्ली और कर्नाटक इस पर विचार कर रहे हैं। दरअसल, केंद्र सरकार ने राज्यों से ब्लैक फंगस को महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत महामारी घोषित करने को कहा है।
सभी राज्यों के प्रमुख सचिवों (स्वास्थ्य) को लिखे पत्र में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने ब्लैक फंगस संक्रमण को महामारी घोषित करने की जरूरत बताते हुए कहा कि इसके इलाज की एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई विशेषज्ञ डाक्टरों को एक साथ काम करना होता है। जिसमें आंख-कान-गला विशेषज्ञ, आंख के सर्जन, दांत व चेहरे के सर्जन के साथ सामान्य सर्जन शामिल होते हैं।
इस संक्रमण के मामले भले ही कम आ रहे हों, लेकिन इससे मौत की आशंका बहुत बढ़ जाती है। महामारी घोषित होने से केंद्रीय स्तर पर इसका डाटा मौजूद रहेगा और इसके इलाज में लगने वाली जरूरी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक बार महामारी घोषित होने के बाद राज्य के भीतर सभी निजी और सरकारी अस्पतालों को भारतीय
आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की गाइडलाइंस के हिसाब से ब्लैक फंगस संक्रमण की जांच करनी होगी और इसकी जानकारी देनी होगी। इससे ब्लैक फंगस संक्रमण की जांच में एकरूपता आएगी और शुरू में ही इसका पता चलने के कारण पूरी तरह इलाज संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों से ब्लैक फंगस संक्रमण की रिपोर्टें आ रही हैं और इससे एकजुट होकर निपटने की जरूरत है।
ब्लैक फंगस इस समय महाराष्ट्र के लिए चिंता का प्रमुख मुद्दा : महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि ब्लैक फंगस इस समय राज्य के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय है क्योंकि इससे 90 लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा की राज्य को और अधिक आपूर्ति की जरूरत है। जिलाधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री के संवाद के दौरान उन्होंने यह बात कही।
इस बैठक में राज्य के 17 जिलाधिकारी शामिल थे। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में टोपे ने कहा कि ब्लैक फंगस के इलाज में जुटे डाक्टरों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने गाइडलाइन तैयार की है। प्रदेश सरकार उनके लिए हर जिले में प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन भी करेगी। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस के मरीज अधिक हैं इसलिए राज्य को एम्फोटेरिसिन-बी (ब्लैक फंगस की दवा) के ज्यादा आवंटन और आपूर्ति की जरूरत है।

