बसों में नहीं हो रहा है कोरोना गाइड लाइन का पालन, मनमाना किराए की वसूली

दतिया ।  दतिया से चलने वाली बसों में जहां मनमाना किराया वसूला जा रहा है, वही कोरोना गाइड लाइन का भी पालन नहीं हो रहा है। अभी भी 130 बसों में से 90 बसें ही चल पा रही है। जिले में बस परिवहन सुविधा अभी भी पूरी तरीके से बहाल नहीं हो पाई है। सभी मार्गों के बस तो चालू हो गई है, परन्तु इनमें मनमाना किराया वसूला जा रहा है। बताया जाता है कि दतिया बस स्टैंड से मुख्य मार्ग के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के अंदरूनी हिस्सों में अब बसें भी शुरू हो गई है।

प्रदेश शासन ने टैक्स जरूर माफ किया है, किंतु यात्री को इससे कोई राहत नही मिल पाई है। दतिया से इंदौर, भोपाल, ग्वालियर झांसी, भिंड और डबरा के लिए प्रतिदिन 1200 यात्री सफर कर रहे हैं। इनमें लंबी दूरी की बसों को छोड़कर किसी में कोरोना गाइड लाइन का पालन नही हो रहा है। प्रशासन का परिवहन विभाग न तो ज्यादा किराए को लेकर कोई कार्रवाई कर रहा है और ना कोरोना की रोकथाम के लिए निजी बस ऑपरेटर्स को चेतावनी तक नहीं दे पा रहा है।

यह है प्रमुख बस मार्ग

दतिया झांसी, दतिया टीकमगढ़, दतिया ललितपुर, दतिया भांडेर, सेवढ़ा, लहार, उन्नाव बालाजी सहित ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मार्ग इन में सम्मिलित है। इन मार्गों पर कही चार तो कही दो बसें चल रही है। बस संचालकों का कहना है कि कुछ क्षैत्रों के पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही है।

किराया अधिक लेने की शिकायत

अनेक यात्री इस बात की शिकायत कर रहे हैं कि किराया अधिक लिया जा रहा है और इसकी कोई सुनवाई भी नहीं हो रही है। माना जा रहा है कि 40 प्रतिशत तक अधिक किराया वसूली हो रही है। जैसे झांसी से दतिया के लिए पूर्व में किराया 30 रुपये लिया जाता था जिसे बस ऑपरेटर ने 50 रुपये कर दिया है। इसी तरह दतिया से ग्वालियर का किराया पूर्व मे 80 रूपये था जो अब 100 रूपये वसूला जा रहा है। यही स्थिति डबरा  तथा अन्य शहरों की है, जहां के लिए दतिया के लिए ज्यादा किराया वसूला जा रहा है। प्रशासन और संबंधित परिवहन विभाग कोई कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।

इस संबंध में निजी बस ऑपरेटर एसोसिएशन दतिया अध्यक्ष तुलसीराम मोटवानी का कहना है कि लंबी दूरी की बसों में तो कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन हो रहा है, किंतु ग्रामीण रूट पर चलनें वाली बसों में जरूर इसका पालन नहीं हो पा रहा हैं। ग्रामीण क्षैत्रों के यात्रियों को कई बार समझाया जाता है, परंतु वे मानते ही नहीं है। ज्यदा किराए की जो बाते है उनमें पर्याप्त सवारियां नहीं मिलने के कारण घाटा पूरा करने के लिए ज्यादा किराया लिया जा रहा है। जब सभी बसें पूरी तरह से प्रारंभ हो जाएगी, तो पहले वाला किराया ही लिया जाएगा।

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