सेवढ़ा में एक्यूप्रेशर पद्धति से रोगों का निदान करने संबंधी शिविर प्रारंभ
दतिया. इंसान के शरीर में रोगों का आना एक स्वभाविक प्रक्रिया है। वर्तमान में अनियमित दिनचर्या व खानपान लोगों को बीमार कर रहा है। कई रोग ऐसे होते हैं जिनका उपचार या तो एलोपैथी में मिलता ही नहीं है और मिलता भी है तो इतना महंगा कि आम आदमी की पहुंच से दूर होता है । इन परिस्थतियों में हमें अपने ही शरीर में मौजूद रोगों के उपचार की विधि का लाभ लेना चाहिए । एक्युप्रेशर वह पद्धति है जिसके जरिए बीमारी आने के बाद भी उसे शरीर से निकाला जा सकता है और नियमित अभ्यास से रोगों से बचा भी जा सकता है। खास बात यह है कि यह पद्धति दवाई रहित है। किसी भी दवाई को लेने के बजाए अपने शरीर में मौजूद प्वाइंट को समझना ही आवश्यक है।इलहाबाद विश्वविद्यालय से आए प्रोफेर एपी चंद्रवंशी ने यह विचार गायत्री प्रज्ञा पीठ परिसर में आयोजित एक्युप्रेशर चिकित्सा प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यक्त किए । कार्यक्रम का आयोजन अखिल विश्व गायत्री परिवार शातिकुंज हरिद्वार के तत्वाधान में किया गया। आयोजित शिविर की शुरूआत रविवार को सुबह 6 बजे हुईं । कार्यक्रम का शुभांरभ करते हुए आचार्य चंद्रवशी ने गायत्री मंत्र एवं ओम मंत्र का जाप किया। तदुपरांत मौजूद लोगों को प्रशिक्षण के लिए जारी नियमावली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन सुबह 6 बजे एवं शाम 4 बजे यह शिविर आयोजित होगा। शाम का शिविर महिलाओं के लिए होगा। इसमें हथेलियों, उंगलियों में छिपे रहस्यों के बारे में बताने के साथ और भी कई उपचार विधि बताई जाएंगी। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. राजेंद्र पाराशर ने किया। पहले दिन दो दर्जन से अधिक लोग शिविर में पहुंचे।

 

 

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