मौत के मुंह से यात्रियों को खींच लाए कैप्टन स्मित : पीएम मोदी ने वीडियो कॉल पर पूछा हाल; बोले — ‘हम जान लेने वाले नहीं, जान बचाने वाले लोग हैं’

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैकड़ों हवाई यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल के जरिए आत्मीय बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना। संकट के अति-संवेदनशील क्षणों में असाधारण सूझबूझ, धैर्य और त्वरित फैसले से यात्रियों को सुरक्षित निकालने वाले पायलट की कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खुद जिंदगी और मौत के बीच जूझने व गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जिससे 140 करोड़ भारतवासियों का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज पूरा देश गर्व से कह सकता है कि हम भारतीय जान लेने वाले नहीं, बल्कि जान बचाने वाले लोग हैं।” उन्होंने गांधी जयंती के पावन अवसर का उल्लेख करते हुए रेखांकित किया कि कैप्टन स्मित ने अपने कर्मों से अहिंसा के वास्तविक मर्म को साकार करके दिखाया है।

17 साल का तजुर्बा, आखिरी दम तक दरवाजा खोलने का संघर्ष : वीडियो संवाद के दौरान कैप्टन स्मित ने उस रोंगटे खड़े कर देने वाले पल का अनुभव साझा किया:

  • विमान के नीचे जाने का हुआ आभास: 17 वर्षों के लंबे उड़ान अनुभव के चलते पायलट को तत्काल आभास हो गया था कि विमान अनियंत्रित होकर नीचे गिर रहा है।

  • खुद फंसे रहे, पर यात्रियों को निकाला: भीषण आपात स्थिति में बुरी तरह फंस जाने और गंभीर चोटें आने के बावजूद उन्होंने आपातकालीन दरवाजा खोलने का अंतिम प्रयास नहीं छोड़ा और यात्रियों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की।

  • हनुमान चालीसा से मिली शक्ति: कैप्टन ने बताया कि मौत से इस सीधी जंग के दौरान वे निरंतर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे, जिसने उन्हें अदम्य आध्यात्मिक संबल और मानसिक संतुलन प्रदान किया।

संस्कार और परिवार के धैर्य की तारीफ: गुजराती में पूछा बच्चों का हाल : प्रधानमंत्री ने कैप्टन के पारिवारिक संस्कारों और उनकी मां के त्याग को नमन किया:

  • माता-पिता और पत्नी का संबल: पीएम मोदी ने कैप्टन के पिता भूपेंद्र भाई, माता गीता बहन और पत्नी सोनल बहन के अटूट धैर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि गीता बहन ने अपने पुत्र को सनातन मूल्यों और श्रीमद्भगवद्गीता के वे अमर संस्कार दिए हैं, जो संकट की घड़ी में ढाल बने।

  • बच्चों का पूछा हाल: प्रधानमंत्री ने अपनी मातृभाषा गुजराती में आत्मीयता से बातचीत करते हुए कैप्टन के नन्हे बच्चों—बॉबी और जीवा का हाल-चाल जाना। उन्होंने यह जानकर विशेष प्रसन्नता जताई कि पायलट अपनी भारतीय जड़ों से जुड़े रहकर रोजाना अपने दो वर्षीय बेटे के साथ हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।

सावरकुंडला से वधावन तक प्रार्थनाएं, सऊदी अरब व यूएई का जताया आभार

  • देशभर में दुआओं का दौर: प्रधानमंत्री ने बताया कि जांबाज पायलट के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु के लिए सावरकुंडला से लेकर वधावन और देश के कोने-कोने में विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती की जा रही है।

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सराहना: संकट के समय अस्पताल में कैप्टन को विश्वस्तरीय और त्वरित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री ने सऊदी अरब और यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) की सरकारों का हृदय से आभार जताया।

  • ‘एक फोन कॉल की दूरी पर हूं’: बातचीत का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने कैप्टन को भरोसा दिलाया कि उनका यह सेवक सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर है। उन्होंने कहा, “जल्द स्वस्थ हो जाइए, ताकि आमने-सामने मुलाकात हो सके; भगवान आप पर कृपा बनाए रखें; जय हिंद।”

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