नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों को नए सेवातीर्थ और कर्तव्य भवनों में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
साउथ ब्लॉक में हुई आख़िरी कैबिनेट बैठक : 13 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक आयोजित हुई। यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का क्षण रहा। इसी परिसर से स्वतंत्र भारत के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में देश के अनेक निर्णायक फैसले लिए गए, जिन्होंने भारत को दिशा और पहचान दी।
गुलामी के दौर से विकसित भारत की ओर कदम : नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। स्वतंत्रता के बाद भी दशकों तक यही इमारतें भारत सरकार के प्रशासनिक केंद्र बनी रहीं। अब इन इमारतों से आधुनिक, तकनीक–सक्षम और पर्यावरण–अनुकूल कार्यस्थलों की ओर यह स्थानांतरण, औपनिवेशिक अतीत से विकसित भारत के भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जा रहा है।
सेवातीर्थ और कर्तव्य भवनों में नई कार्यसंस्कृति : नए भवनों में स्थानांतरण का उद्देश्य केवल कार्यालय बदलना नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति को और अधिक नागरिक–केंद्रित, कुशल और सेवा–भाव आधारित बनाना है। सरकार का मानना है कि आधुनिक अधोसंरचना से कर्मयोगियों की उत्पादकता बढ़ेगी और जनता तक सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी।
‘युगे युगीन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय बनेगा पहचान का केंद्र : कैबिनेट ने यह भी संकल्प लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को मिलाकर ‘युगे युगीन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय विकसित किया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक यात्रा को एक साथ प्रदर्शित करेगा, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।


