नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये तक की विशेष सहायता योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण परिस्थितियों के चलते विमानन कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में यह सहायता व्यवस्था एयरलाइंस को परिचालन लागत नियंत्रित करने में मदद करेगी और यात्रियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से राहत मिलेगी।
यात्रियों पर किराए का बोझ कम करने की कोशिश : नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार लगातार विमानन क्षेत्र की मजबूती और यात्रियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि ईंधन लागत एयरलाइंस के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है और कीमतों में अचानक वृद्धि से हवाई किराए पर भी असर पड़ता है। नई सहायता योजना से इस अनिश्चितता को कम करने में मदद मिलेगी।
पहले भी दिए गए थे राहत पैकेज : सरकार इससे पहले भी विमानन कंपनियों को आर्थिक सहायता प्रदान कर चुकी है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एयरलाइंस को वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया गया था, जिससे उन्हें संचालन जारी रखने में मदद मिली। इसके अलावा कई राज्यों ने भी एटीएफ पर करों में कमी कर विमानन क्षेत्र को राहत देने का प्रयास किया है।
36 माह तक लागू रहेगी व्यवस्था : जानकारी के अनुसार यह सहायता व्यवस्था प्रारंभिक रूप से 36 माह तक लागू रहेगी। इस दौरान समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी। योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों की एक समिति भी गठित की जाएगी, जो सहायता राशि के उपयोग और उससे जुड़े सभी पहलुओं पर नजर रखेगी।

