देहरादून । एक तरफ सरकार की ‘वात्सल्य योजना’ और दूसरी तरफ कूड़े के ढेर और दुर्गंध में संक्रमित पीपीई किट, मास्क, ग्लब्स व फेस शील्ड बीनते बच्चे, सरकार की योजनाओं की सच्चाई बयां करते हैं। सरकार ने दावा किया है कि ‘वात्सल्य योजना’ संक्रमण की रोकथाम और बच्चों का ख्याल रखने के लिए है। लेकिन राजधानी देहरादून के कारगीग्रांट में स्थित नगर निगम का कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन सरकार के दावे का खुलेआम मखौल उड़ा रहा है। यहां बच्चे शहर के कूड़े संग पहुंची इस्तेमाल की हुई पीपीई किट, मास्क आदि बीनने का काम कर रहे।
निगम ने शहर का कूड़ा उठान, कूड़े को पृथक करने और अंत में इसे कूड़ा निस्तारण प्लांट तक पहुंचाने के लिए चेन्नई की एमएसडब्लू कंपनी से करार कर रखा है। तमाम कायदों व सरकार के निर्देशों को ठेंगा दिखाकर कंपनी सामान्य कूड़े में से बायोमेडिकल वेस्ट को पृथक करने के लिए बच्चों का इस्तेमाल कर रही। यह हाल तब है जब पिछले वर्ष भी कंपनी पर इसी जुर्म में 50 हजार रुपये जुर्माना लग चुका है। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर केंद्र सरकार ने पिछले साल ही समस्त राज्य सरकारों को उपयोग किए गए मास्क, पीपीई किट, फेस शील्ड और ग्लब्स आदि का तय नियमों के अंतर्गत निस्तारण करने के आदेश दिए थे।
नियमानुसार इनका निस्तारण बायोमेडिकल वेस्ट प्लांट में होना चाहिए, लेकिन देहरादून शहर में यह घरों से निकलने वाले कूड़े के साथ या तो डोर-टू-डोर कूड़ा उठान करने वाली गाड़ियों में डाले जा रहे हैं या सड़क किनारे लगे कूड़ेदानों में। कई दफा यह सड़क पर भी गिरे हुए मिल रहे। इस सबके बावजूद कूड़ा उठान व निस्तारण करने वाली कंपनी उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं कर रही। दरअसल शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान करने की जिम्मेदारी चेन्नई एमएसडब्ल्यू के पास है।
कंपनी छोटी गाड़ियों से कूड़ा उठान कर इसे हरिद्वार बाइपास पर ट्रेंचिंग ग्राउंड में ले जाती है और वहां से कांपेक्टर या डंपरों के जरिए कूड़ा शीशमबाड़ा में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाता है। तय शर्तों के तहत ट्रांसफर स्टेशन पर कूड़े को बीनने का काम नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कंपनी बच्चों से कूड़ा बीनने का काम करा रही है। पिछले साल भी क्षेत्रीय निवासियों की शिकायत पर नगर निगम की स्वास्थ्य अनुभाग की टीम ने यहां छापे की कार्रवाई की थी तो शिकायत के सही पाए जाने पर नगर आयुक्त ने कोविड-19 के तहत एसओपी का उल्लंघन व महामारी अधिनियम के तहत कंपनी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
इस मामले में संबंधितों का कहना है कि कंपनी के खिलाफ पिछले साल भी इस संबंध में शिकायत मिली थी तो निगम की ओर से जुर्माना लगाकर चेतावनी जारी की गई थी। अगर कंपनी दोबारा यही कृत्य कर रही है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम गोपनीय तरीके से इसकी जांच करेगा।


