कोयला गैसीकरण को बढ़ावा : केंद्र सरकार ने 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को दी मंजूरी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयात घटेगा !

नई दिल्ली।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की बड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और विभिन्न आयातित उत्पादों पर निर्भरता कम करना है।

सरकार के अनुसार यह योजना सतह के समीप उपलब्ध कोयला एवं लिग्नाइट संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देगी। इसके माध्यम से एलएनजी, यूरिया, अमोनिया, मेथनॉल और अन्य रसायनों के आयात में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा। वर्तमान में इन उत्पादों के लिए भारत को बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

75 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य : योजना के तहत नई गैसीकरण परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार ने लगभग 75 मिलियन टन कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनियों को संयंत्र एवं मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। परियोजनाओं का चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

किसी एक परियोजना को अधिकतम 5 हजार करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकेगी, जबकि किसी एक समूह को कुल मिलाकर 12 हजार करोड़ रुपये तक का लाभ मिलेगा।

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा : सरकार का अनुमान है कि इस योजना से करीब 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होगा। इसके साथ ही देशभर में लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। विशेष रूप से कोयला उत्पादन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

आयात बिल कम करने की दिशा में बड़ा कदम : सरकार के अनुसार पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण भारत का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025 में एलएनजी, यूरिया, अमोनिया, मेथनॉल और अन्य उत्पादों पर देश का आयात खर्च करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा। ऐसे में कोयला गैसीकरण परियोजनाएं आयात विकल्प विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

स्वदेशी तकनीक को मिलेगा बढ़ावा : योजना में तकनीक-स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे स्वदेशी तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके जरिए विदेशी ठेकेदारों पर निर्भरता कम करने और भारत की घरेलू गैसीकरण क्षमता को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।

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