UP के पावर प्लांट्स में 8.41 लाख टन पहुंचा कोयले का स्टॉक; मंत्रालय बोला- बिजली संकट की वजह ईंधन नहीं, संयंत्रों का कमजोर 48% PLF

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में कोयले की आपूर्ति बाधित होने से बिजली संकट की मीडिया रिपोर्टों पर केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय ने तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) के ताप विद्युत गृहों में कोयले की कोई गंभीर कमी नहीं है। कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) राज्य को जरूरत से ज्यादा कोयला उपलब्ध करा रहा है। इसके साथ ही मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त सलाह दी है कि वह पिछले 10 वर्षों से निष्क्रिय पड़े अपने 973 मिलियन टन भंडार वाले ‘सहरपुर जमरपानी’ कैप्टिव कोल ब्लॉक के विकास में तेजी लाए, ताकि बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता खत्म हो सके।

आंकड़ों में मजबूत है उत्तर प्रदेश का कोयला भंडार:

● स्टॉक में निरंतर उछाल: यूपी के ताप विद्युत संयंत्रों में कोयला भंडार 1 सितंबर 2026 को 7.25 लाख टन था, जो 15 सितंबर 2026 तक बढ़कर 8.41 लाख टन पहुंच गया है।

● खपत से अधिक आवक: पिछले एक सप्ताह से राज्य को प्रतिदिन औसतन 0.90 लाख टन कोयला प्राप्त हो रहा है, जबकि दैनिक औसत खपत मात्र 0.83 लाख टन है।

● प्रतिदिन 17.7 रैक की आपूर्ति: कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा पिछले 10 दिनों से प्रतिदिन औसतन 17.7 कोयला रैक यूपी के बिजली घरों को भेजे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त सड़क (RCR) मार्ग से भी अतिरिक्त स्टॉक उठाने का विकल्प दिया गया है।

10 साल से निष्क्रिय पड़ा 973 मिलियन टन क्षमता का ब्लॉक : कोयला मंत्रालय ने रिकॉर्ड पर रखा कि झारखंड के दुमका जिले में स्थित ‘सहरपुर जमरपानी’ कोल ब्लॉक 13 अगस्त 2015 को UPRVUNL को विशेष रूप से उसके बिजली संयंत्रों के लिए आवंटित किया गया था।

इस ब्लॉक में 973 मिलियन टन का भारी भंडार है। हालांकि, एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी यूपी विद्युत उत्पादन निगम की ओर से कोई ठोस प्रगति नहीं की गई। इसी अवधि में अन्य राज्यों और कंपनियों को आवंटित 14 अन्य कैप्टिव ब्लॉक चालू होकर सफलतापूर्वक उत्पादन कर रहे हैं।

कम बिजली उत्पादन की असली वजह: सिर्फ 48% प्लांट लोड फैक्टर : मंत्रालय ने उत्पादन निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए रेखांकित किया कि पर्याप्त कोयला (8.41 लाख टन) उपलब्ध होने के बावजूद चालू माह में यूपी के थर्मल पावर प्लांट्स का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) लगभग 48 प्रतिशत ही रहा है। इसके अलावा संयंत्रों में समय पर रैक खाली (Unload) न कर पाने के कारण रेलवे को रैक संचालन पर प्रतिबंध लगाने पड़ते हैं।

मंत्रालय ने राज्य सरकार को स्पष्ट कहा है कि बिजली उत्पादन में सुधार के लिए अपने संयंत्रों की आंतरिक परिचालन बाधाओं को दूर किया जाए, न कि कोयले की अनुपलब्धता का बहाना बनाया जाए।

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