कमिश्नर व आईजी ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किया रतनगढ़ का दौरा
 दतिया.रतनगढ़ माता पर दीपावली की दोज के दिन लगने वाले विशाल मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। बुधवार की सुबह जिला प्रशासन द्वारा समूचे जिले के अधिकारी कर्मचारियों को यह आदेश जारी किया गया कि वह तत्काल रतनगढ़ माता मंदिर पर पहुंचकर व्यवस्थाओं से संबंधित अपने कार्य को संभाले । आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्वालियर कमिश्नर आशीष सक्सेना एवं आईजी चंबल भी व्यवस्थाओं को देखने पहुंच रहे हैं। दोपहर 12 बजे जारी इस आदेश के बाद पूरे जिले के अधिकारी रतनगढ़ माता मंदिर पर पहुंच गए। शाम 4 बजे कमिश्नर व आईजी के साथ कलेक्टर व एसपी ने रतनगढ़ माता मंदिर क्षेत्र का दौरा किया। अधिकारियों ने रतनगढ़ माता मंदिर परिसर, कुंवर बाबा महाराज ग्वालियर की ओर से आने वाली रास्ते, दतिया के ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के मार्ग को देखा तथा कुल 8 पार्किंग स्थलों पर विशेष तौर पर जाकर वहां की क्षमता की जानकारी ली ।इस दौरान कमिश्नर सक्सेना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी कर्मठता से करें। व्यवस्थाएं पूर्व के वर्षों की तरह लगाई जाएंगी पर मेला आयोजित नहीं होगा। वह अधिकारियों के द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में यह कहते भी देखे गए कि शासन को पत्र भेज दिया गया है, शासन स्तर से कोई निर्णय आ सकता है, लेकिन साथ ही कलेक्टर दतिया विजय दत्ता को यह आदेश भी दिया कि वह जन प्रतिनिधियों से चर्चा कर यह तय करें कि बंध के लिए आने वाले लोगों को और आम दर्शनार्थियों के बीच अंतर कैसे किया जा सकता है। इसके लिए कलेक्टर गुरुवार को बैठक आयोजित कर सकते हैं। हालांकि बैठक जिला मुख्यालय पर होने की संभावना है । क्योंकि रतनगढ़ माता मंदिर से जुड़े सभी निर्णय प्रशासन जिले के कलेक्ट्रेट सभागार में बैठकर लेता है, जबकि मंदिर से जुड़े निर्णय पर रतनगढ़ माता मंदिर क्षेत्र अथवा सेवढ़ा के लोगों की जानकारी और व्यवस्थाओं से जुड़े अनुभव अधिक हैं। ऐसे में अगर प्रशासन दतिया में बैठक लेता है तो यह भी खानापूर्ति हो सकती है।

सूत्रों की मानें तो कोविड संक्रमण की गाइड लाइन के कारण रतनगढ़ माता मंदिर का मेला आयोजित नहीं हो सकता । लेकिन प्रशासन द्वारा मान्यताओं का हवाला देते हुए शासन को एक पत्र भेजा गया है। शासन से विशेष अनुमति आने पर यह मेला आयोजित हो सकता है। अन्यथा प्रशासन द्वारा 200 लोगों के ग्रुप को मंदिर पर पहुंचा कर बंध कटने की परंपरा का निर्वहन किया जा सकता है । ऐसी जानकारी अधिकारियों के बीच से निकल कर आ रही है। इसमें प्रशासन की चिंता सिर्फ इतनी है कि वह कैसे तय करें कि बंध कटवाने के लिए कौन आया है। यहां बता दें कि रतनगढ़ माता मंदिर पर सर्पदंश पीड़ितों के बंध काटे जाते हैं, सदियों पुरानी इस परंपरा का निर्वहन कराना प्रशासन के लिए ऐसे वक्त में बड़ी चुनौती है। इसलिए वह बार-बार मेले के स्थगन की जानकारी जारी कर आम श्रद्धालुओं को दर्शनों के लिए रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है

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