त्रिपुरा विधानसभा का आम चुनाव : चुनावी प्रचार के दौरान कांग्रेस के राज्य प्रभारी पर हमला, EC का एक्शन

नई दिल्ली : एआईसीसी के पदाधिकारियों की नुमाइंदगी के आधार पर और प्राप्त हुई विभिन्न सूचनाओं के मद्देनज़र भारत के निर्वाचन आयोग ने जिरानिया, पश्चिम त्रिपुरा में एआईसीसी के प्रभारी पर हुए कथित हमले को लेकर अपने दिनांक 19.01.2023 के पत्र के माध्यम से त्रिपुरा राज्य से रिपोर्ट मंगवाने का निर्णय लिया।

त्रिपुरा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाबतलबी की गई है कि राज्य में पर्याप्त संख्या में सीएपीएफ कर्मियों की तैनाती के बावजूद स्थिति क्यों बिगड़ी। इस राज्य के दौरे के दौरान और उसके बाद आयोग के सख्त निर्देशों के बावजूद इस हिंसक घटना के होने पर आयोग ने कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपनी नाराजगी ज़ाहिर की है।

सीएस और डीजीपी को सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने और पक्षपातपूर्ण अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया। आयोग ने सीएस और डीजीपी को समय पर उचित कार्रवाई नहीं करने पर निम्नलिखित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है:

● जिरानिया सब-डिवीजन, पश्चिम त्रिपुरा के एसडीपीओ का निलंबन और तत्काल निष्कासन

● रानी बाजार थाना प्रभारी को तत्काल हटाया जाए

● जिरानिया थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए

सीएस और डीजीपी राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं पर खतरे की आशंका का तुरंत आकलन करें और बिना किसी देरी के खतरे की धारणा के अनुसार उन्हें सुरक्षा प्रदान करें।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी, त्रिपुरा को निर्देश दिया गया था कि वे जिला निर्वाचन अधिकारियों को दोबारा कहें कि पहले आओ, पहले पाओ आधार पर वे राजनीतिक दलों को अनुमति सुगम करें, और बैठकों, रैलियों, रोड शो आदि के लिए राजनीतिक दलों के आवेदनों को निपटाने के लिए सुविधा ऐप को लोकप्रिय बनाएं।

आयोग द्वारा तीन विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। उन्हें स्थिति का जायजा लेने, सीएपीएफ की उचित तैनाती सुनिश्चित करने, प्रवर्तन उपायों को तेज करने और आयोग को वापस रिपोर्ट करने हेतु तुरंत राज्य जाने के लिए कहा गया है।

● योगेंद्र त्रिपाठी (आईएएस: 1985, कर्नाटक) – भारत सरकार के सचिव के रूप में सेवानिवृत्त एक शानदार आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने केंद्र और राज्य दोनों में विविध कार्य संभाले हैं।

●  विवेक जौहरी (आईपीएस: 1984, मध्य प्रदेश) – एक प्रशंसित आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्होंने मध्य प्रदेश के डीजीपी के रूप में कार्य किया है और केंद्रीय एजेंसियों को संभालने के व्यापक अनुभव के साथ-साथ वे पूर्वोत्तर और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का गहन ज्ञान रखते हैं।

● बी. मुरली कुमार, 1983 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, उन्होंने 2022 के गुजरात और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में विशेष पर्यवेक्षक के रूप में चुनाव ड्यूटी की है। हाल में संपन्न हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में 800 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती का काम किया।

राज्य सरकार की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि डॉ. अजॉय कुमार को एक गैरकानूनी रैली में मामूली चोटें आईं (घटना उस क्षेत्र में हुई जहां जिला अधिकारियों द्वारा अनुमति नहीं दी गई थी) और ये बात सच नहीं है कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।

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