दतिया | दतिया विधानसभा उपचुनाव में 28 जुलाई को चुनाव प्रचार थम चुका है। 30 जुलाई को विधानसभा क्षेत्र में मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित किया जाएगा। प्रचार अभियान के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपनी पूरी ताकत झोंकी, लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस के भीतर नेताओं की नाराजगी, दूरी और आपसी खींचतान का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा। ऐसे में चुनावी मैदान में बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी का असर उसके वोट बैंक पर पड़ेगा और क्या इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है?
उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के पक्ष में पार्टी के कई बड़े नेताओं ने प्रचार किया, लेकिन इसके बावजूद कुछ पुराने और प्रभावशाली कांग्रेस नेताओं की सक्रियता पहले जैसी नजर नहीं आई। 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार पार्टी के भीतर एकजुटता को लेकर सवाल उठते रहे। वहीं भाजपा ने इस चुनाव में कांग्रेस की कथित अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाते हुए इसे जनता के सामने भी रखा। हालांकि, इन राजनीतिक समीकरणों का वास्तविक असर कितना पड़ा, इसका फैसला अब 30 जुलाई को मतदाता अपने मताधिकार से करेंगे और 3 अगस्त को आने वाला परिणाम तस्वीर साफ करेगा।
अवधेश नायक की नाराजगी बनी चर्चा का विषय : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अवधेश नायक की नाराजगी इस उपचुनाव में पार्टी के लिए सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही। उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बाद नायक ने घनश्याम सिंह से पहले नामांकन फॉर्म खरीदा था और उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी इस बार उन्हें अपना प्रत्याशी बनाएगी। हालांकि, कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को टिकट दिया। टिकट नहीं मिलने के बाद अवधेश नायक काफी दिनों तक कांग्रेस के चुनाव प्रचार से दूर रहे और उनकी गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चाओं को हवा दी।
बाद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के आग्रह और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कोशिशों के बाद अवधेश नायक कांग्रेस के प्रचार अभियान में शामिल हुए, लेकिन उनकी सक्रियता और चुनावी उत्साह 2023 के विधानसभा चुनाव जैसा नजर नहीं आया। ऐसे में राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा रही कि टिकट नहीं मिलने की नाराजगी कहीं उनके समर्थकों के बीच भी तो नहीं है। हालांकि, कांग्रेस ने नाराजगी दूर करने की कोशिश की। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक मंच से वर्ष 2023 में अवधेश नायक के टिकट का विरोध करने की बात स्वीकार करते हुए उनसे माफी भी मांगी थी। इसके बावजूद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नायक और उनके समर्थकों की नाराजगी का चुनावी असर कितना रहा।
राजेंद्र भारती की सीमित सक्रियता भी बनी चर्चा : दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती भी इस चुनाव में कांग्रेस के प्रचार अभियान में अपेक्षाकृत कम सक्रिय नजर आए। चुनाव प्रचार की शुरुआत से ही उनकी मौजूदगी सीमित रही और उन्होंने अंतिम दिन की प्रचार रैली में जरूर हिस्सा लिया, लेकिन पूरे अभियान के दौरान उनकी सक्रियता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
बताया गया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधायक जयवर्धन सिंह सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने राजेंद्र भारती के घर पहुंचकर उनसे चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया था। हालांकि, पार्टी की ओर से उनकी स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया गया। बावजूद इसके, उनकी सीमित सक्रियता को कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजेंद्र भारती का क्षेत्र में अपना प्रभाव और समर्थक वर्ग माना जाता है। ऐसे में उनकी कम सक्रियता का कितना असर कांग्रेस के वोट बैंक पर पड़ा, यह परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।
राजू दांगी का भाजपा में जाना भी कांग्रेस के लिए झटका : कांग्रेस के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका राजू दांगी के भाजपा में शामिल होने को माना जा रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान राजू दांगी कांग्रेस के सक्रिय चेहरों में शामिल थे और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के दतिया दौरे के दौरान उनकी भूमिका भी चर्चा में रही थी। हालांकि, अब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और अपने साथ कई कांग्रेस समर्थकों को भी भाजपा के पाले में ले गए।
इसके बाद उन्होंने भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। आपको बता दें कि 4 जुलाई को कांग्रेस की सभा के दौरान भी उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के सामने पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की कथित उपेक्षा और नाराजगी का मुद्दा उठाया था। ऐसे में कांग्रेस के पुराने नेताओं में से एक राजू दांगी का भाजपा में जाना पार्टी के लिए निश्चित तौर पर राजनीतिक नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है।
अब 30 जुलाई को होगा फैसला : दतिया उपचुनाव में अब प्रचार का शोर थम चुका है और राजनीतिक दलों की नजरें मतदान पर हैं। कांग्रेस के सामने जहां अपने नेताओं और समर्थकों को एकजुट रखने की चुनौती रही, वहीं भाजपा ने कांग्रेस की कथित अंदरूनी खींचतान को अपने पक्ष में मुद्दा बनाने की कोशिश की। हालांकि, चुनाव में अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे। 30 जुलाई को मतदान के बाद 3 अगस्त को मतगणना होगी और इसी दिन दतिया की जनता के फैसले से यह साफ हो जाएगा कि कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा या पार्टी अपने वोट बैंक को संभालने में सफल रही।

