कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर जताया भरोसा : साफ-सुथरी छवि वाले नेता पर खेला दांव, जानिए क्या कहते हैं चुनावी समीकरण !

दतिया | दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने पूर्व विधायक एवं दतिया राजपरिवार के मुखिया घनश्याम सिंह को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अब चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। भाजपा ने पहले ही आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, जबकि आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने दामोदर यादव को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में दतिया में इस बार मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है।

रविवार को आएंगे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी : मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी 12 जुलाई (रविवार) को दतिया पहुंचेंगे। शाम 7:30 बजे वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और रात्रि विश्राम दतिया में करेंगे।इसके बाद 13 जुलाई (सोमवार) को सुबह 10:00 बजे दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के नामांकन कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद दोपहर 1:00 बजे दतिया से प्रस्थान करेंगे।

कुछ दिन पहले ही मंच से दिया था बड़ा संकेत : कुछ दिन पहले दतिया में आयोजित कांग्रेस की विशाल जनसभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। इसी सभा में घनश्याम सिंह ने मंच से कहा था कि वे टिकट की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन यदि पार्टी उन्हें जिम्मेदारी सौंपती है तो पूरी निष्ठा और ईमानदारी से चुनाव लड़ेंगे।

राजनीति का लंबा अनुभव : 72 वर्षीय घनश्याम सिंह जिले की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। उन्होंने एमए तक शिक्षा प्राप्त की है। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जूदेव वर्ष 1984 में भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद रहे थे। घनश्याम सिंह दतिया विधानसभा से दो बार तथा सेवढ़ा विधानसभा से एक बार विधायक रह चुके हैं।

कई चुनावी उतार-चढ़ाव देख चुके हैं : घनश्याम सिंह ने वर्ष 1993 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर दतिया विधानसभा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2003 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की। हालांकि 2008 में उन्हें तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी डॉ. नरोत्तम मिश्रा से हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें सेवढ़ा विधानसभा से मैदान में उतारा। वर्ष 2018 में उन्होंने जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे, जबकि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी प्रदीप अग्रवाल से पराजय मिली।

क्षत्रिय समाज में मजबूत पकड़ : घनश्याम सिंह दतिया राजपरिवार से आते हैं, इसलिए जिले के क्षत्रिय समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। हर वर्ष दशहरा पर्व पर किला परिसर में आयोजित होने वाली विशाल क्षत्रिय सभा एवं शोभायात्रा का नेतृत्व भी वे करते रहे हैं। पिछले वर्ष आयोजित इसी कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और भाजपा नेता रामू तोमर भी शामिल हुए थे। इसी मंच से दिग्विजय सिंह ने कहा था कि “मेरी हार्दिक इच्छा है कि घनश्याम सिंह दतिया से विधायक बनें।”

गौरतलब है कि उस समय दतिया में उपचुनाव की कोई चर्चा तक नहीं थी, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। संयोग यह है कि जिस नेता को लेकर दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक मंच से अपनी इच्छा व्यक्त की थी, आज उसी घनश्याम सिंह को कांग्रेस ने दतिया विधानसभा उपचुनाव में अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। 

सिंधी समाज के समर्थन की भी चर्चा : दतिया में सिंधी समाज का भी प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है। शहर में आयोजित होने वाले ज्योति स्नान महोत्सव सहित कई सामाजिक आयोजनों में घनश्याम सिंह वर्षों से विशेष अतिथि के रूप में शामिल होते रहे हैं। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में यह माना जा रहा है कि व्यापारी वर्ग से जुड़े सिंधी समाज का एक वर्ग उनके पक्ष में समर्थन दे सकता है।

मुस्लिम वोट बैंक पर भी कांग्रेस की नजर : राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को भी अपने पक्ष में एकजुट करने की कोशिश करेगी। जिले में इस वर्ग के मतदाताओं की भूमिका भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाली मानी जाती है। हालांकि इसका वास्तविक असर मतदान के दिन ही स्पष्ट होगा।

अब मुकाबला पूरी तरह स्पष्ट : भाजपा से आशुतोष तिवारी, कांग्रेस से घनश्याम सिंह और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) से दामोदर यादव के मैदान में आने के बाद दतिया विधानसभा उपचुनाव का मुकाबला अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है। जिले का राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है।

 

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