नई दिल्ली | प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कानून को और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने बुधवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी। विधेयक पर सदन में मंगलवार को करीब 9 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जबकि बुधवार को विपक्ष की ओर से राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। चर्चा के दौरान विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच विधेयक पारित किया गया।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई : संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य सरकारी और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना और पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है। नए प्रावधानों के तहत परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्रों को लीक करने, अनुचित तरीके अपनाने या ऐसी गतिविधियों में सहयोग करने वाले दोषियों पर पहले की तुलना में ज्यादा सख्त दंड का प्रावधान किया गया है।
कानून में किए गए बदलावों के बाद गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि कड़े दंड से पेपर लीक और परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सरकार का जोर : देशभर में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक की घटनाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में संशोधित कानून को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेहनत के दम पर परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों के हितों से किसी भी तरह का समझौता न हो।
नए प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों पर कानूनी कार्रवाई का दायरा मजबूत करने की कोशिश की गई है। इससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जांच एजेंसियों और संबंधित संस्थानों को अधिक प्रभावी कानूनी आधार मिलने की उम्मीद है।
राज्यसभा में वंदे मातरम् को लेकर संशोधन विधेयक पारित : वहीं, राज्यसभा में भी बुधवार को राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के जरिए राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण देने से जुड़े प्रावधान किए गए हैं।
प्रस्तावित बदलावों के तहत राष्ट्रगीत के अपमान, उसके प्रति अनादर या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने जैसी गतिविधियों को दंडनीय अपराध के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था देश के राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
राष्ट्रगीत के अपमान पर 3 साल तक की सजा : संशोधित विधेयक में वर्ष 1971 के मूल कानून में बदलाव का प्रस्ताव है। इसके तहत वंदे मातरम् के अपमान या अनादर के मामले में अधिकतम 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।
इस संशोधन के जरिए राष्ट्रगीत की गरिमा को कानूनी रूप से मजबूत करने की कोशिश की गई है। अब इन दोनों विधेयकों के पारित होने के बाद परीक्षा प्रणाली की शुचिता और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में कानूनी प्रावधानों को पहले से अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ा है।

