नई दिल्ली | प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा घोटालों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कानून को और सख्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 में दोषियों के लिए कठोर सजा के साथ जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने का प्रस्ताव है। नए प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा कायम करना तथा लाखों अभ्यर्थियों की वर्षों की मेहनत को पेपर लीक माफिया से बचाना है।
संगठित परीक्षा अपराध में 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ का न्यूनतम जुर्माना : संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े अलग-अलग अपराधों के लिए सजा बढ़ाने का प्रस्ताव है। व्यक्तिगत स्तर पर परीक्षा में धोखाधड़ी या पेपर लीक जैसे मामलों में 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
वहीं, परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता संस्थाओं के लिए जुर्माने की अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपए करने और उन्हें लोक परीक्षा आयोजित करने से 8 साल तक प्रतिबंधित करने का प्रावधान है। संस्थानों के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन को भी जिम्मेदार ठहराते हुए 5 से 10 साल तक की सजा और 5 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
पेपर लीक सिंडिकेट पर सबसे सख्त कार्रवाई : संगठित तरीके से परीक्षा में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह और परीक्षा माफिया के खिलाफ भी कानून को कठोर बनाया गया है। ऐसे संगठित अपराधों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। इसका मकसद परीक्षा से जुड़े संगठित आपराधिक नेटवर्क पर आर्थिक और कानूनी दोनों स्तरों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
जांच के लिए विशेष कार्यबल, 2 महीने में पूरी करनी होगी जांच : संशोधन में परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच को तेज करने के लिए केंद्र सरकार को विशेष कार्यबल गठित करने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। किसी मामले की जांच विशेष कार्यबल को सौंपे जाने के बाद वही एजेंसी उस पूरे मामले की जांच करेगी।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जांच की समय-सीमा से जुड़ा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसी या विशेष कार्यबल—जिस एजेंसी को मामला सौंपा गया हो, उसे एफआईआर दर्ज होने या जांच सौंपे जाने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
हर राज्य में बनेगा विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट : परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों को वर्षों तक अदालतों में लंबित रहने से रोकने के लिए प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक सत्र न्यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय के रूप में अधिसूचित करने का प्रावधान है।
इन अदालतों में मामलों की सुनवाई बिना अनावश्यक स्थगन के लगातार करने और आरोप-पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला देने का लक्ष्य रखा गया है। कानून लागू होने के समय पहले से लंबित परीक्षा संबंधी मामलों को भी संबंधित विशेष अदालतों में स्थानांतरित करने का प्रावधान है।
फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील का रास्ता : विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील सीधे हाईकोर्ट में की जा सकेगी। अपील की सुनवाई दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा किए जाने का प्रावधान है और हाईकोर्ट को अपील स्वीकार होने के बाद तीन महीने के भीतर निपटारे का प्रयास करना होगा।
सामान्य मामलों में अपील 30 दिनों के भीतर दायर करनी होगी। उचित कारण होने पर देरी माफ की जा सकती है, लेकिन 90 दिन के बाद अपील स्वीकार नहीं की जाएगी। जमानत से जुड़े आदेशों के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील का प्रावधान रखा गया है।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा? : नए प्रस्तावित प्रावधानों का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो पेपर लीक, नकल या परीक्षा में धोखाधड़ी के जरिए लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। कठोर सजा, भारी जुर्माना, विशेष जांच व्यवस्था और तेज न्यायिक प्रक्रिया के जरिए परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की कोशिश की गई है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें अभ्यर्थियों को उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर निष्पक्ष अवसर मिले और पेपर लीक या संगठित नकल जैसी घटनाओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित न हो।

