नववर्ष पर पीतांबरा पीठ पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 50 हजार ने किए दर्शन

दतिया ।  नए साल के मौके पर शुक्रवार को सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल पीतांबरा पीठ पर 50 हजार लोगों ने पहुंचकर मां के दरबार में माथा टेका । स्थानीय एवं बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं ने मां पीतांबरा और धूमावती माई के दर्शन पीठ पर किए। देर शाम तक दर्शनार्थियों के आने का क्रम जारी था। मंदिर में व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पश्चिम गेट और उत्तर गेट सहित वीआईपी       द्वार को भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था। इस दौरान पीतांबरा चौराहे पर कई बार वाहनों के कारण जाम की िस्थति       भी बनी।

पीतांबरा मंदिर ट्रस्ट के प्रशासक महेश दुबे ने जानकारी में बताया कि सुबह साढ़े पांच बजे से ही दर्शनार्थियों का आना शुरू हो गया था और मंदिर के बेरीकेटिंग में लगातार भीड़ से बनी रही। यह क्रम लगातार मंदिर में दर्शनों के लिए निर्धारित समय तक चलता रहा। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए मुख्य द्वार से आगमन कर उत्तर द्वार से निर्गम की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने भी पीतांबरा पीठ पर अतिरिक्त कर्मचारी लगाकर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था का काम देखा। पीतांबरा पीठ चौराहे से लेकर सिविल लाइंस तक अनेक बार जाम जैसी स्थिति देखी गई।

बाहरी प्रदेशों से पहुंचे श्रद्धालु की रही भीड़

पीतांबरा पीठ पर दर्शन करने के लिए उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा मप्र के ही कई दूरदराज के शहरों से श्रद्धालु यहां नववर्ष पर दर्शन करने पहुंचे थे। लखनऊ से आए राधाकृष्ण यादव ने बताया कि प्रतिवर्ष नए साल पर मां पीतांबरा के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस बार वे परिवार को भी साथ लाए हैं। इसी तरह भिलाई छत्तीसगढ़ से आए अभिषेक शर्मा जो पेशे से इंजीनियर हैं, ने बताया कि बच्चों व परिवार के अलावा अपने माता पिता के साथ दतिया पीतांबरा पीठ दर्शन करने पहुंचे है। नववर्ष पर मां के दर्शन से बड़ा कोई काम और पुण्य नहीं है।

मंदिर के सामने दिन भर बने जाम के हालात

कोरोना संक्रमण के बाद नए वर्ष में पहली बार पीतांबरा पीठ पर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं। पीतांबरा पीठ से सिविल लाइंस के रास्ते पर लगभग आधा दर्जन से अधिक यातायात कर्मचारी लगा रखे थे। इसके बावजूद भी अनेक बार जाम की स्थिति बनती रही। इसके अलावा मंदिर के आसपास के सभी होटल और खाने-पीने के रेस्टोरेंट पर भी काफी भीड़ रही। प्रशासक महेश दुबे के अनुसार कोरोना के बाद इतनी भीड़ पहली बार जुटी है, हालांकि सभी श्रद्धालुओं को सुविधाजनक ढंग से दर्शन कराए गए।

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