अभूतपूर्व बिजली संकट के मुहाने पर खड़ा देश, यूपी समेत कई राज्यों में छा सकता है ‘अंधेरा’, समझें कितना बड़ा है खतरा

नई दिल्ली : विद्युत उत्पादक संयंत्रों में कोयले की घोर किल्लत के चलते देश के कई राज्यों में बिजली की किल्लत बढ़ती जा रही है। झारखंड में आपूर्ति में कमी के कारण 285 मेगावाट से लेकर 430 मेगावाट तक की लोड शेडिंग करनी पड़ी।

इसके चलते दिन में गांवों में आठ से दस घंटे तक की कटौती हुई। वहीं, बिहार में पांच गुना अधिक कीमत पर भी पूरी बिजली नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी बिजली की किल्लत लगातार बढ रही है।

ऊर्जा विकास निगम के मुताबिक राज्यों को डिमांड के मुकाबले काफी कम बिजली सेंट्रल पूल से मिल रही है। नेशनल पावर एक्सचेंज में भी बिजली का टोटा है। पूरे देश में लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली की कमी बताई जा रही है। इसकी वजह से नेशनल पावर एक्सचेंज में बिजली की प्रति यूनिट दर में चौतरफा वृद्धि हो गई है। सामान्य तौर पर पांच रुपये प्रति यूनिट में मिलने वाली बिजली दर प्रति यूनिट 20 रुपये हो गई है।

मांग के मुकाबले कम बिजली उपलब्ध 

झारखंड में बिजली की मांग लगभग 2200 मेगावाट है। राज्य के विद्युत उत्पादक संयंत्रों से अधिकतम 500 मेगावाट तक बिजली उपलब्ध होती है। बाकी की डिमांड सेंट्रल पूल के जरिये उपलब्ध कराई जाने वाली बिजली से होती है। इसमें डीवीसी और एनटीपीसी की इकाइयों के जरिये बिजली आती है। इसका एक बड़ा हिस्सा रेलवे को भी जाता है।

पांच गुना अधिक कीमत पर भी बिहार को नहीं मिल पा रही पूरी बिजली

कोयला संकट के कारण बिजली उत्पादन में आई कमी ने बिहार को एक बड़ी परेशानी में डाल दिया है। दस दिन पहले तक बिहार चार रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली की खरीद कर रहा था। यह दर अब बढ़कर 20 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, फिर भी आपूर्ति पूरी नहीं हो रही। बाजार से न्यूनतम चार सौ मेगावाट बिजली बिहार को खरीदनी है।

ऐसे में बिजली कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा। एनटीपीसी से भी अभी तीन से साढ़े तीन हजार मेगावाट बिजली ही मिल रही, जबकि बिहार की वर्तमान खपत प्रतिदिन 5600 मेगावाट तक है।

पनबिजली व पवन ऊर्जा की आपूर्ति भी कम 

बिहार में बिजली कंपनी आंध्र प्रदेश से 600 से 800 मेगावाट बिजली खरीदती थी। मौसम के कारण वहां से अभी तीन सौ मेगावाट से अधिक की आपूर्ति नहीं है। इसी तरह भूटान से मिलने वाली छह सौ मेगावाट पनबिजली की मात्रा भी घटकर अभी आधी हो गई है।

सीएम की अपील-एसी कम चलाएं

राजस्थान में बिजली संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों से एयरकंडीशन (एसी) कम चलाने और बिजली की बचत करने की अपील की है। उन्होंने अधिकारियों से बिजली की बचत के लिए लोगों को जागरूक करने की बात भी कही है। उन्होंने सरकारी विभागों में जरूरत नहीं होने पर बिजली के उपकरणों को बंद रखने की बात कही है। राज्य के उर्जामंत्री बीडी कल्ला ने केंद्र सरकार से राज्य को कोयले का आवंटित कोटा प्रतिदिन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

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