धोखाधड़ी केस में दतिया विधायक राजेंद्र भारती दोषी करार : दिल्ली कोर्ट का फैसला, तिहाड़ जेल भेजे गए !

दतिया/नई दिल्ली : मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में दतिया से विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया गया है। दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया और न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजने के आदेश दिए। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित था और इसकी सुनवाई को लेकर कई बार विवाद भी सामने आए। खास बात यह रही कि स्वयं विधायक की याचिका पर ही इस केस को ग्वालियर से दिल्ली स्थानांतरित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस मामले को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद यहां सुनवाई आगे बढ़ी।

बैंक से जुड़े विवाद ने लिया कानूनी रूप : जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से जुड़ा हुआ है। आरोप था कि विधायक के परिवार से संबंधित एक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की अवधि में कथित रूप से बदलाव कर अनुचित लाभ प्राप्त किया गया। इस मुद्दे को लेकर बैंक के एक कर्मचारी द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा और धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि एफडी की मूल अवधि में हेरफेर कर उसे अधिक समय तक दर्शाया गया, जिससे अतिरिक्त ब्याज का लाभ लिया गया। वहीं, बचाव पक्ष लगातार इन आरोपों को खारिज करता रहा और इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित मामला बताता रहा।

राजनीतिक दबाव के आरोप भी रहे चर्चा में : इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू यह रहा कि विधायक राजेंद्र भारती ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार पर राजनीतिक दबाव बनाने के आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि ग्वालियर में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है, इसलिए केस को अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे स्वीकार करते हुए केस दिल्ली स्थानांतरित किया गया।

फैसले के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर : कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब इस मामले में सजा की अवधि और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल विधायक को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इस फैसले का असर आने वाले समय में स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

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