दतिया : नगर पालिका में पदस्थ रहे लिपिक दिलीप गौड ने झांसी स्थित अपने निवास पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न केवल नगर पालिका बल्कि जिला प्रशासन में भी हलचल पैदा कर दी है। आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में दिलीप ने नगर पालिका के सीएमओ सहित दो कर्मचारियों पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।
रविवार को हुई इस घटना का खुलासा तब हुआ जब परिवार के सदस्य छत पर बने कमरे में पहुंचे और दिलीप को फंदे पर लटका पाया। सूचना मिलते ही झांसी के प्रेमनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। जांच के दौरान पुलिस को मृतक के मोबाइल से एक वीडियो मिला, जिसे आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किया गया बताया जा रहा है। सोमवार को जैसे ही यह वीडियो सामने आया, प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए।
वीडियो में क्या बोले दिलीप : वीडियो में दिलीप गौड ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। वे नगर पालिका की स्थापना शाखा में पदस्थ थे। उन्होंने दावा किया कि पूर्व कार्यकाल से जुड़े कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा था। संबंधित मामला पूर्व में लोकायुक्त तक भी पहुंच चुका है और जांच लंबित बताई जा रही है।
दिलीप के अनुसार, एक पुरानी नोटशीट से जुड़े दस्तावेज पर साइन करने के लिए उन पर दबाव डाला गया। उन्होंने वीडियो में कहा कि साइन करने के बदले 50 हजार रुपये की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। इसके बाद उन्हें स्थापना शाखा से हटाकर ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा गाड़ियों की गिनती के कार्य में लगा दिया गया। वीडियो में गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं।
प्रशासन ने की कार्रवाई : मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता अपर कलेक्टर करेंगे और उसे तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
वीडियो में जिन कर्मचारियों के नाम सामने आए, उनमें से लिपिक राजेश दुबे को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मस्टर कर्मी धर्मेंद्र शर्मा को कार्य से पृथक करने की कार्रवाई की गई है। विभागीय स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई है।
सीएमओ ने आरोपों को बताया निराधार : नगर पालिका सीएमओ नागेंद्र गुर्जर ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि दिलीप गौड नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहते थे और उनके व्यवहार में किसी प्रकार की असामान्यता नहीं दिखी थी। वे अवकाश लेकर झांसी गए थे और वहां क्या परिस्थितियां बनीं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों स्तर पर जांच जारी है। वीडियो की सत्यता और लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


