दतिया । जिले में निर्मित किए जाने वाले गुड को प्रोत्साहित करें । जिससे दतिया जिले में बनने वाले गुड की पहचान अन्य स्थानों पर भी हो सके और कृषकों को भी बेहतर दाम मिले। यह निर्देश कलेक्टर संजय कुमार ने सोमवार को समय-सीमा के पत्रों की समीक्षा के दौरान जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र महाप्रबंधक को दिए। कलेक्टर ने बैठक में समय-सीमा के पत्रों की समीक्षा के साथ शासन के प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों एवं अभियानों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप एक जिला एक उत्पाद की तर्ज पर इस अंचल में गन्ने की बम्पर पैदावार देखते हुए किसानों को चिन्हित कर उन्हें गुड बनाने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के एक किसान द्वारा 50 प्रकार का गुड तैयार किया है। जिसमें से एक प्रकार का औषधी युक्त गुड भी तैयार किया है। जिसकी कीमत लगभग 5 हजार रुपये प्रति किलो है। अतः इस प्रकार का गुड तैयार करने के लिए किसानों को प्रशिक्षण प्रदाय कर प्रोत्साहित करना होगा। इस प्रकार के गुड से जहां किसानों की आय में बेहतर इजाफा होगा, वहीं गुड निर्माण के क्षेत्र में भी दतिया का नाम राष्ट्रीय स्तर पर होगा। इसके लिए उद्योग विभाग कृषि विभाग के सहयोग से कृषकों को चिन्हित कर गुड़ बनाने के लिए प्रोत्साहित करें और उनके मार्केटिग की भी व्यवस्था करें।
सीएम हैल्प लाईन के 3800 प्रकरण निपटे
कलेक्टर ने कहा कि प्राथमिकता वाले कार्यक्रम सीएम हैल्प लाईन में प्राप्त लंबित प्रकरणों के निराकरण में इस माह में बेहतर कार्य किया गया है। इसी रणनीति के तहत सभी विभागों द्वारा 3800 प्रकरणों का निराकरण कर सराहनीय है। यह रणनीति आगे भी उसी रूप में जारी रखते हुए प्रकरणों को संतुष्टि पूर्ण एवं गुणवत्ता के साथ निराकरण की कार्रवाई करें।
धान का सत्यापन करने के निर्देश
कलेक्टर ने शासन द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की समीक्षा करते हुए कहा कि उपार्जन का कार्य अंतिम चरण में होने पर उपार्जन केन्द्रों पर खाद्य, राजस्व एवं संबंधित विभाग विशेष ध्यान रखें। अंतिम दिनों में जिले के कितने किसानों द्वारा धान बेचा गया है। उसका सत्यापन भी आवश्यक रूप से करें जिससे जिले के किसान के नाम पर व्यापारी एवं बिचैलिए धान न बेच सके।
स्व-सहायता समूहों को दे गणवेश सिलाई का काम
कलेक्टर ने कहा कि एनआरएलएम के महिला स्वसहायता समूह द्वारा बेहतर गतिविधियां संचालित कर महिलाएं आत्म निर्भर बन रही है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मिलने वाली गणवेश का भी निर्माण स्वसहायता समूह से कराया जाए। इसके लिए सिलाई के केन्द्र में कार्य करने वाले समूह को चिन्हित करें।

