चुनाव प्रक्रिया संबधी याचिका पर आयोग से दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तिथि तय की

नईदिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग (ईसी) को निर्देश दिए हैं कि वह अंतर-पार्टी चुनावों के लिए एक आदर्श प्रक्रिया तैयार करने और इसे देश के सभी राजनीतिक दलों के संविधान में शामिल करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करे।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने आयोग को नोटिस जारी किया और उससे अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 23 दिसंबर की तिथि तय की।

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि उसने इस संबंध में नई याचिका दायर की है, क्योंकि उसके प्रतिवेदन पर आयोग का पहले दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं था। याचिकाकर्ता ने पहले भी याचिका दायर की थी। अदालत ने तब आयोग को निर्देश दिया था कि वह इस याचिका को प्रतिवेदन समझकर इस पर फैसला करे। इसी के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया था।

कमल हासन के राजनीतिक दल ‘मक्कल निधि मय्यम’ (एमएनएम) के संस्थापक सदस्यों में शामिल एवं वकील सी राजशेखरन ने यह याचिका दायर की है। राजशेखरन ने दावा किया कि राजनीतिक दलों के आंतरिक चुनावों में नियामक के तौर पर आयोग की निगरानी का अभाव है।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि आयोग ने 1996 में सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के साथ-साथ पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दलों को एक पत्र जारी करके कहा था कि वे अपने संगठनात्मक चुनावों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का पालन नहीं कर रहे हैं। आयोग ने उनसे आंतरिक चुनावों से संबंधित अपने-अपने संविधानों का ईमानदारी से पालन करने का आह्वान किया था।

याचिका में कहा गया है कि अन्य निजी संगठनों/संस्थानों के विपरीत राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है और इसका काफी असर देश के शासन पर पड़ता है, क्योंकि जब ये राजनीतिक दल सत्ता में आते हैं, तो उनमें पादर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र का अभाव उनके गैर लोकतांत्रिक शासन मॉडल में भी प्रतिबिंबित होता है।

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