दतिया। दतिया की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अदालत ने एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
तत्कालीन थाना प्रभारी अरविंद भदौरिया, हेड कांस्टेबल पुष्पराज, कांस्टेबल कपिल शर्मा और महिला कांस्टेबल पूजा सिकरवार के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए हैं।
घर में प्रवेश और मारपीट के आरोप : मामला एक स्थानीय निवासी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मार्च 2024 में पुलिस दल बिना वैध अनुमति के घर में प्रवेश कर गया और वहां मौजूद परिवार के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार तथा मारपीट की गई। शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि घटना के दौरान मोबाइल फोन छीने गए और रिकॉर्ड किए गए वीडियो हटाए गए।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी : सुनवाई के दौरान यह तर्क रखा गया कि पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पूर्व सरकारी अनुमति आवश्यक है। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि आरोपित कृत्य सरकारी दायित्वों के दायरे से बाहर हैं और नागरिक अधिकारों के संभावित उल्लंघन से जुड़े हैं, तो ऐसे मामलों में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच के निर्देश : मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने तथा उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कथित रूप से हटाए गए वीडियो डेटा की तकनीकी जांच कर उसे पुनः प्राप्त करने की संभावना तलाशने को भी कहा गया है।
अधिकारियों को भेजी गई आदेश की प्रति : अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को आदेश की प्रति भेजते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही गंभीरता से ली जाएगी।
कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मामला : यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश पुलिस जवाबदेही, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और कानून के समान अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। अब सभी की निगाहें जांच प्रक्रिया और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

