शिवपुरी। शिवपुरी के सोनचिरैया होटल में आयोजित ‘अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज’ के भव्य सम्मेलन में मध्य प्रदेश शासन के पूर्व गृहमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शिवपुरी आगमन पर डॉ. मिश्रा के स्वागत में गाड़ियों का लंबा काफिला उमड़ पड़ा और कार्यकर्ताओं ने कतारबद्ध खड़ी जेसीबी मशीनों से पुष्पवर्षा कर अगवानी की। कार्यक्रम में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज और परशुराम सेना द्वारा वरिष्ठ नेता का भव्य सम्मान व नागरिक अभिनंदन किया गया।

मंच से सभा को संबोधित करते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण समाज और सनातन संस्कृति पर राजनीतिक लाभ के लिए अनर्गल टिप्पणी करने वालों पर तीखा प्रहार किया और समाज को एकजुट होकर मुखर रहने का आह्वान किया।
‘जब राज ही नहीं किया तो शोषण कहां से कर लिया?’ : डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मणों पर लगाए जाने वाले ऐतिहासिक शोषण के आरोपों को तार्किक रूप से खारिज करते हुए कहा:
चारों युगों का दिया संदर्भ: “सत्ययुग, त्रेता और द्वापर में क्षत्रियों और यादवों का शासन रहा। इसके बाद मौर्य, बौद्ध, फिर 600 वर्षों तक मुगलों और अंग्रेजों का शासन रहा। पिछले 70-75 वर्षों से संविधान का राज है। जब ब्राह्मणों ने कभी राज ही नहीं किया, तो उन्होंने किसका शोषण कर लिया? यह आज तक समझ से परे है।”
‘खामोशी को कमजोरी न समझें, हम परशुराम के वंशज हैं’ : पूर्व गृहमंत्री ने मंच से ओजस्वी कविता पढ़ते हुए स्वाभिमान से खड़े रहने का संदेश दिया: “द्वंद्व कहां तक पाला जाए, युद्ध कहां तक टाला जाए, तू है परशुराम का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए… खामोशी ज्यादा अच्छी नहीं लगती, वह कमजोरी मानी जाने लगती है। हम ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के प्रणेता हैं, लेकिन हमारी सहिष्णुता को कायरता समझने की भूल कोई न करे।”

सांप और जुगनू का दिया दृष्टांत : उन्होंने आलोचकों पर कटाक्ष करते हुए कहा, “एक मित्र ने पूछा कि आप कुछ नहीं बोलते फिर भी लोग पीछे क्यों पड़े हैं? मैंने कहा कि जैसे सांप जुगनू के पीछे पड़ जाता है क्योंकि उससे जुगनू की चमक बर्दाश्त नहीं होती, वैसे ही विरोधियों से समाज का तेज देखा नहीं जा रहा है।”
● ‘ब्राह्मण नाम विश्वास और त्याग का है’ : डॉ. मिश्रा ने सनातन धर्म में ब्राह्मणों के त्याग और समर्पण को रेखांकित किया:
● सर्वकल्याण की कामना: “ब्राह्मण मंदिर में भूखा-प्यासा बैठकर भी ‘प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो’ और ‘सर्वे सन्तु निरामयाः’ की प्रार्थना करता है। चींटी से लेकर हाथी तक और गरीब से लेकर अमीर तक सबके कल्याण की कामना करने वाला केवल ब्राह्मण है।”
● पौराणिक प्रमाण: “रावण को सीता हरण करना था तो उसने ब्राह्मण का वेश बनाया; कर्ण को परशुराम जी से दीक्षा लेनी थी तो ब्राह्मण का वेश धारण किया; पांडवों को अज्ञातवास में छिपना पड़ा तो ब्राह्मण का रूप लिया। ऐसा इसलिए, क्योंकि ब्राह्मण सदैव सत्य और अटूट विश्वास का प्रतीक रहा है।”
● जातिवाद के आरोपों पर तीखा जवाब: “कहते हैं कि ब्राह्मणों ने समाज को जातियों में बांटा। अगर हमने जातियों में बांटा होता, तो जाति प्रमाणपत्र लेने लोग तहसील क्यों जाते? मंदिर क्यों नहीं आते? भारत में सबसे कम मूर्तियां अगर किसी की हैं, तो वह भगवान परशुराम की हैं।”

● प्राचीन भारतीय विज्ञान की श्रेष्ठता: “हमारा पंचांग 100 साल पहले ही चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण की सटीक तिथि बता देता है, जबकि आधुनिक वैज्ञानिक कुछ दिन पहले अनुमान लगाते हैं। महाभारत काल में बंद कमरे से संजय ने पूरी गीता और युद्ध का सजीव चित्रण किया था—यह हमारे पूर्वजों का विज्ञान था।”
मंच पर यह प्रमुख जन रहे उपस्थित : कार्यक्रम में प्रदेश निगम अध्यक्ष व वरिष्ठ साथी कौशल शर्मा, रवि शर्मा, दुर्गा प्रसाद शर्मा, शोभा शर्मा, ओमी गुरुजी, आशा उपाध्याय, ज्योति शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, राजकुमार शर्मा, भारती हरदेनिया, गोपी शर्मा, निशा पालीवाल, रीना शर्मा सहित अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज एवं परशुराम सेना के सैकड़ों पदाधिकारी और विप्र बंधु मौजूद रहे।

