जूट की बोरियों की कमी की वजह से अब नहीं होगी किसानों की फसल बर्बाद, समिति ने लिया यह फैसला

नई दिल्ली : पंजाब और हरियाणा जैसे खाद्यान्न उत्पादक राज्यों और अनाज खरीद एजेंसियों ने कपड़ा मंत्रालय के तहत जूट पर स्थायी सलाहकार समिति (एसएसी) की बैठक में बंगाल की जूट मिलों द्वारा जूट की बोरियों की आपूर्ति में कमी का मुद्दा उठाया। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

केंदद्रीय कपड़ा मंत्रालय के तहत काम करने वाले जूट की स्थायी सलाहकार समिति (एसएसी) की बुधवार को बैठक हुई जिसमें वर्ष 2021-22 में जूट की बोरियों में वस्तुओं की पैकेजिंग के लिए आपत्तियों की जांच, विचार और सिफारिश की गई।

इंडियन जूट मिल्स एसोसिएशन (आइजेएमए) के अध्यक्ष राघव गुप्ता ने कहा कि हमने आश्वासन दिया कि आगामी भारी फसल उत्पादन के साथ, जूट मिलें सरकार को 34 लाख गांठ बोरी की आपूर्ति कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि उद्योग को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ा, उन्हें मिल मालिकों ने सामने रखा।

गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2020-21 के सत्र में जूट उद्योग लाकडाउन के कारण जूट बोरियों की पूरी आपूर्ति नहीं कर सका और चक्रवात एम्फन के कारण भारी फसल का नुकसान हुआ, जिससे कच्चे जूट की कीमत में भारी वृद्धि हुई। बंगाल करता है 80 प्रतिशत जूट बोरियों की आपूर्ति देश के लगभग 80 प्रतिशत पटसन के बोरे बंगाल की मिलों से प्राप्त होते हैं। सूत्रों ने कहा कि कई राज्य कम आपूर्ति होने से नाखुश थे।

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग का मानना है कि जेपीएम (जूट पैकेजिंग सामग्री) अधिनियम के जूट की बोरी के प्रयोग की अनिवार्यता संबंधी मौजूदा प्रावधानों में ढील दी जानी चाहिए।

अधिनियम कहता है कि 100 प्रतिशत खाद्यान्न की पैकेजिंग जूट की बोरियों में होनी चाहिए। सरकार ने 2021-22 के रबी सीजन के लिए उच्च घनत्व वाले पालीथीन/पालीप्रोपाइलीन (एचडीपीई/पीपी) बैग की 7.7 लाख गांठ के उपयोग के लिए पहले ही छूट दे दी है। 

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