प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी : 4,000 साल पुरानी ढोकरा कला से महतारी वंदन तक, छाई छत्तीसगढ़ की अनूठी विरासत

नई दिल्ली/रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश-विदेश के दौरों और कार्यक्रमों में भेंट किए गए स्मृति चिह्नों (मोमेंटो) की 8वीं ई-नीलामी में छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। नीलामी में प्रदर्शित 16 स्मृति चिह्नों का संग्रह राज्य की प्राचीन धातु-ढलाई परंपरा, जनजातीय जीवनशैली, गहरी धार्मिक आस्था और आधुनिक विकास के सफर को एक साथ प्रस्तुत करता है।

इस संग्रह का मुख्य आकर्षण 4,000 से अधिक वर्ष पुरानी ‘ढोकरा कला’ (लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग) से तैयार की गई विशिष्ट धातु कृतियां हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित यह ई-नीलामी आधिकारिक वेब पोर्टल पर जारी है, जिसमें नागरिक अपनी पसंद की कलाकृतियों पर बोली लगा सकते हैं। नीलामी से प्राप्त समस्त धनराशि का उपयोग गंगा नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए समर्पित ‘नमामि गंगे परियोजना’ में किया जाएगा।

ढोकरा शिल्प और बस्तर की अनूठी जनजातीय परंपराएं  : नीलामी में रखी गई कलाकृतियों में राज्य की पारंपरिक धातु-ढलाई विधा का उत्कृष्ट रूप देखने को मिलता है:

  • विशिष्ट ढोकरा मूर्तियां: संग्रह में पारंपरिक मोम-पिघलाकर ढलाई (Lost-Wax Technique) से निर्मित हाथी के मुख वाले नंदी, खड़े मुद्रा में नंदी और माड़िया-माड़िन जनजातीय दंपति की धातु प्रतिमाएं शामिल हैं।

  • पारंपरिक अनुष्ठानिक पगड़ी: जनजातीय छत्तीसगढ़ के रिवाजों को दर्शाती एक खास पारंपरिक पगड़ी भी प्रदर्शित है, जिसमें मोर पंख, कौड़ियां, धातु की चकती और पीतल की घंटियों का बारीक काम किया गया है।

भक्ति और लोक आस्था का संगम: रामनामी स्टोल से लेकर शिवालयों तक : संग्रह में छत्तीसगढ़ की समृद्ध आध्यात्मिक विविधता की झलक भी मौजूद है:

  • ‘राम राम’ अंकित रामनामी स्टोल: पूरे कपड़े पर “राम राम” के मंत्र से बुना रामनामी समाज का पारंपरिक स्टोल, जो राज्य की विशिष्ट भक्ति परंपरा का प्रतीक है।

  • प्रसिद्ध धार्मिक स्थल: राज्य के प्रतिष्ठित तीर्थों और आस्था केंद्रों—हाटकेश्वर महादेव, बुढ़ेश्वर महादेव, जय मां कुदरगढ़ी और मधेश्वर महादेव को दर्शाते कलात्मक स्मृति चिह्न भी इस संग्रह का हिस्सा हैं।

आधुनिक छत्तीसगढ़: महतारी वंदन योजना और नवा रायपुर की झलक : प्राचीन परंपराओं के साथ-साथ यह संग्रह राज्य के समकालीन स्वरूप और विकास यात्रा को भी प्रदर्शित करता है:

  • महतारी वंदन योजना पर वुडकट: महिला सशक्तीकरण की दिशा में शुरू की गई ‘महतारी वंदन योजना’ को उकेरती लकड़ी की सुंदर नक्काशीदार (वुडकट) पट्टी।

  • रजत जयंती और नया रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती का प्रतीक चिह्न और आधुनिक राजधानी ‘नवा रायपुर’ के शैक्षणिक व प्रशासनिक संस्थानों के स्केल मॉडल भी शामिल किए गए हैं।

31 अक्टूबर तक बढ़ी बोली लगाने की अंतिम तिथि : कला प्रेमियों और आम नागरिकों के उत्साह को देखते हुए ई-नीलामी की अंतिम तारीख को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दिया गया है। इच्छुक लोग आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से इन दुर्लभ स्मृतियों को अपने घर का हिस्सा बनाने के लिए ऑनलाइन बोली में भाग ले सकते हैं।

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