नई दिल्ली | केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत के शहर अब केवल आबादी के केंद्र नहीं, बल्कि देश की आर्थिक संरचना के मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। सर्वे के अनुसार, घनत्व और शहरी गतिविधियाँ उत्पादकता, रोजगार, नवाचार और आर्थिक वृद्धि को गति दे रही हैं।
भारत पहले से ही आर्थिक रूप से शहरी देश : आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत आर्थिक और कार्यशील दृष्टि से आधिकारिक परिभाषाओं से कहीं अधिक शहरी हो चुका है। यूरोपीय आयोग के ग्लोबल ह्यूमन सेटलमेंट लेयर (GHSL) के सैटेलाइट डेटा के अनुसार, वर्ष 2015 में भारत लगभग 63 प्रतिशत शहरी था, जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों से लगभग दोगुना है।
सर्वे में यह भी अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2036 तक भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी शहरों और कस्बों में निवास करेगी, जबकि शहरी क्षेत्र वर्तमान में देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 70 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं।
शहरी आवागमन में ऐतिहासिक विस्तार : आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, पिछले एक दशक में देश में शहरी मोबिलिटी नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ है। 24 शहरों में लगभग 1036 किलोमीटर लंबा मेट्रो और आरआरटीएस नेटवर्क विकसित किया गया है।
इसके साथ ही पीएम ई-बस सेवा के तहत सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर 10,000 ई-बसें शुरू की गई हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये की सहायता और भुगतान सुरक्षा तंत्र उपलब्ध कराया है।
स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में बड़ी उपलब्धि : सर्वेक्षण में बताया गया है कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी और अमृत/अमृत 2.0 के तहत देश ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014-15 में जहां घर-घर कचरा संग्रह नगण्य था, वहीं 2025-26 तक शहरी वार्डों में यह बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है। इसके लिए 2.5 लाख से अधिक कचरा संग्रहण वाहनों का बेड़ा कार्यरत है।
स्मार्ट सिटीज़ और किफायती आवास : स्मार्ट सिटीज़ मिशन के तहत 9 मई 2025 तक 8,067 परियोजनाओं में से 90 प्रतिशत से अधिक पूरी की जा चुकी हैं, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के दोनों चरणों में 122.06 लाख आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 96.02 लाख आवास बनकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
भविष्य की शहरी नीति पर जोर : आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी रेखांकित किया गया है कि भविष्य की शहरी नीति में केवल परियोजनाओं की संख्या नहीं, बल्कि तंत्र के प्रदर्शन, जवाबदेही और परिणामों को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा, ताकि भारत की शहरी विकास यात्रा और अधिक समावेशी एवं टिकाऊ बन सके।


