भारत निर्वाचन आयोग ने 18वीं लोकसभा के लिए नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची राष्ट्रपति को सौंपी

नई दिल्ली : मुख्य निर्वाचन आयुक्त  राजीव कुमार ने निर्वाचन आयुक्त  ज्ञानेश कुमार और डॉ. सुखबीर सिंह संधू के साथ राष्ट्रपति से मुलाकात की। उनके द्वारा माननीया राष्ट्रपति को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 73 के संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना की एक प्रति सौंप दी गई, जिसमें 18वीं लोकसभा के आम चुनावों के बाद लोक सभा के लिए निर्वाचित सदस्यों के नाम शामिल हैं।

इसके बाद, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, दोनों निर्वाचन आयुक्त और आयोग के वरिष्ठ अधिकारी आम चुनाव 2024 के सफल संचालन के बाद राष्ट्रपिता का आशीर्वाद लेने के लिए राजघाट गए।

राजघाट पर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद आयोग का बयान: “हम यहां राष्ट्र द्वारा हमें सौंपे गए पवित्र कार्य, 18वीं लोकसभा के आम चुनाव सम्‍पन्‍न कराने के बाद राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए खड़े हैं। हम भारत के लोगों की इच्छा को लगभग अहिंसक तरीके से उत्प्रेरित करने के बाद अपने दिल में विनम्रता लिए हुए यहां खड़े हैं।

“लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है”, यह वह स्पष्ट प्रतिबद्धता थी जिसके साथ 16 मार्च, 2024 को 18वीं लोकसभा के चुनावों की घोषणा की गई थी। चुनावी प्रक्रिया को हिंसा से मुक्त रखने की इस प्रतिज्ञा के पीछे हमारी प्रेरणा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी थे। उन्होंने इंसान के बीच समानता की वकालत की और सभी के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों की वकालत की।

महात्मा के विचारों में, वयस्क मताधिकार “सभी प्रकार के वर्गों की सभी उचित आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम बनाता है”। मतदान केन्‍द्रों पर उत्सव के मूड में लंबी कतारें और मतपत्र के माध्यम से अपने भविष्य का फैसला करने का दृढ़ संकल्प महात्मा के पोषित आदर्शों और भारत की सभ्यतागत विरासत का प्रमाण था।

आयोग ने पूरे दिल, दिमाग और पूरी ईमानदारी के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है कि: सबसे आम भारतीय का मताधिकार किसी भी कीमत पर नकारा न जाए, बल्कि इसे सख्ती से सक्षम बनाया जाए; कि दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रतियोगिता लोकतांत्रिक अधिशेष पैदा करे; और हमारे विशाल परिदृश्य में शामिल करोड़ों लोगों के गहन कार्यों में किसी भी रूप में हिंसा की थोड़ी सी भी छाया पड़ने की अनुमति न हो। जम्मू-कश्मीर और मणिपुर समेत भारत के सभी राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों ने अपने परिपक्व आचरण से एक मिसाल कायम की है जो भविष्य के लिए शुभ संकेत है। शांति और विकास का रास्ता गोली नहीं बल्कि मतपत्र है।

हम इस शपथ के साथ अपनी बात समाप्त करते हैं कि भारत के निर्वाचन आयोग की राष्ट्र के प्रति सेवा, जो अब अपने 76वें वर्ष में है, अडिग समर्पण के साथ जारी रहेगी। हमने अफवाहों और निराधार संदेहों के साथ चुनावी प्रक्रिया को दूषित करने के सभी प्रयासों को खारिज कर दिया, जो अशांति भड़का सकते थे। भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में अपार आस्था रखने वाले आम आदमी की ‘इच्छा’ और ‘बुद्धि’ की जीत हुई है। हम नैतिक और कानूनी रूप से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव आयोजित करके हमेशा इसी भावना को बनाए रखने के लिए बाध्य हैं।

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